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यौन सुख बढ़ाने के लिए

Posted By: Hemant Kumar Posted On: May 08, 2026Share Article
यौन सुख बढ़ाने के लिए
FGM पर तीखी बहस जारी (Photo- ITGD)

महिलाओं के खतना पर SC में तीखी बहस, वकील ने कहा- यौन सुख बढ़ाने के लिए है FGM, भड़के जस्टिस

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने कहा है क धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक स्वास्थ्य और मानवीय गरिमा के अधीन है. कोर्ट ने यह टिप्पणी दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित FGM प्रथा की वैधता पर सुनवाई के दौरान की.

सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संवैधानिक पीठ के सामने सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित फिमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) की प्रथा पर भी तीखी बहस छिड़ गई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को दाऊदी बोहरा समुदाय के कुछ वर्गों में प्रचलित फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) की प्रथा को लेकर मौखिक रूप से चिंता जताई.

दरअसल, FGM को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई अब सबरीमाला मामले के साथ ही की जाएगी. इसका मुख्य कारण यह है कि संविधान के धार्मिक आजादी से जुड़े (अनुच्छेद 25 और 26) जो मुद्दे वर्तमान में 9 जजों की पीठ के विचाराधीन हैं, उनका सीधा प्रभाव इस मामले पर भी पड़ेगा.

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रथा महिलाओं के गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है. दूसरी ओर इस प्रथा के समर्थकों का कहना है कि यह उनकी धार्मिक आस्था का अभिन्न हिस्सा है और उन्हें अनुच्छेद 25 के तहत इसे जारी रखने का अधिकार है.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के सामने संवेदनशील मुद्दा है क्योंकि एक तरफ अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मिलने वाली धार्मिक स्वतंत्रता है तो दूसरी तरफ मानवीय गरिमा, स्वास्थ्य और महिलाओं की यौन स्वायत्तता.

FGM का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने बेंच को बताया कि यह प्रथा 7 साल की छोटी बच्चियों पर की जाती है और इससे उनके शरीर में ऐसा बदलाव आता है जिसे ठीक नहीं किया जा सकता, जिसका असर उनकी यौन और प्रजनन स्वास्थ्य पर पड़ता है.

उन्होंने दलील दी कि कई परिवार इस प्रथा का पालन इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें डर रहता है कि अगर वे इसका पालन नहीं करेंगे तो उन्हें समाज से निकाल दिया जाएगा. लूथरा ने तर्क दिया कि इस प्रथा को अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं माना जा सकता और इसलिए इसे अनुच्छेद 26 के तहत किसी धार्मिक संप्रदाय के अधिकारों का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए.

वहीं, जस्टिस जॉयमाल्य बागची की मौखिक टिप्पणी इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है क्योंकि उन्होंने कहा कि इस प्रथा को रोकने के लिए शायद बहुत जटिल संवैधानिक व्याख्याओं की जरूरत ही न पड़े क्योंकि इस प्रथा पर आर्टिकल 25 के तहत स्वास्थ्य के आधार पर ही रोक लगाई जा सकती है.

जस्टिस बागची ने याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 25, जो धार्मिक स्वतंत्रता देता है, उसमें स्पष्ट लिखा है कि धार्मिक स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के दायरे में ही मिलेगी.

जस्टिस बागची ने कहा, 'जहां तक महिलाओं के खतना (FGM) का सवाल है, हमें शायद दूसरे अधिकारों पर विचार करने की भी जरूरत न पड़े. इसके लिए सिर्फ स्वास्थ्य और सार्वजनिक स्वास्थ्य शब्द ही काफी हो सकते हैं.'

इस बात से सहमति जताते हुए लूथरा ने कहा कि इस प्रथा में क्लिटोरिस के आस-पास की त्वचा को हटा दिया जाता है जिससे कम से कम 10,000 तंत्रिका-सिरों (nerve endings) को ऐसा नुकसान पहुंचता है जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती.

लूथरा ने आगे कहा कहा, 'यह महिलाओं के शरीर के एक बहुत जरूरी अंग को काटना है और इसका सीधा असर उनकी शारीरिक, प्रजनन और भावनात्मक सेहत पर पड़ता है. जहां कोई प्रथा किसी व्यक्ति की शारीरिक स्वायत्तता में दखल देती है और किसी जरूरी अंग को नुकसान पहुंचाती है तो वह अनिवार्य रूप से अनुच्छेद 25 और 26 के तहत तय सीमाओं यानी सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य और नैतिकता का उल्लंघन करती है

उन्होंने यह भी बताया कि 59 देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है.

जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी की कि यह प्रथा अनुच्छेद 25 के तहत नैतिकता के आधार पर भी सवालों के घेरे में आएगी. जस्टिस बागची ने कहा कि इस प्रथा का पालन न करने पर समाज से बहिष्कृत किए जाने के परिणामों के साथ-साथ इस धार्मिक प्रथा का किसी व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक समग्रता पर पड़ने वाले प्रभाव की भी जांच किए जाने की जरूरत है.

न्यायमूर्ति वराले ने इसके प्रभाव को कई गुना बताते हुए चिंता व्यक्त की जबकि न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि इस प्रथा का मूल उद्देश्य महिलाओं की कामुकता (sexuality) को नियंत्रित करना था.

लूथरा ने दलील दी कि बेंच को समुदाय के भीतर काम करने वाले ढांचे (power structures) और उन सामाजिक मजबूरियों पर भी विचार करना चाहिए जिनका सामना लोगों को करना पड़ता है.

इस पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने पूछा कि क्या लूथरा यह सुझाव दे रहे हैं कि अगर कोई धार्मिक प्रथा किसी व्यक्ति के अन्य मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है तो अनुच्छेद 25 और 26 के बावजूद कोर्ट को हस्तक्षेप करना चाहिए जिसका जवाब लूथरा ने हां में दिया.

उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि इस प्रथा का शिकार होने वाले लोग नाबालिग हैं जो कानूनी रूप से सहमति देने में असमर्थ हैं. साथ ही बेंच ने स्पष्ट किया कि इसकी तुलना पुरुषों के खतना से करना गलत है.

इसी बीच अधिवक्ता निजाम पाशा ने हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया कि फिमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (FGM) का पालन न करने की स्थिति में किसी भी सदस्य को समुदाय से निष्कासित नहीं किया जाता. उन्होंने इस प्रक्रिया को अंग-भंग (mutilation) के रूप में परिभाषित किए जाने पर भी कड़ा विरोध जताया.

हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह एक तथ्यात्मक पहलू है जिस पर अलग से विचार किया जाएगा. पाशा ने तर्क दिया कि समुदाय के भीतर इस प्रथा को न अपनाने के कोई सांसारिक या सामाजिक दुष्परिणाम नहीं हैं. भले ही व्यक्तिगत रूप से कुछ सदस्यों की यह आध्यात्मिक मान्यता हो सकती है कि इसके कुछ धार्मिक परिणाम हो सकते हैं.

न्यायमूर्ति बागची ने एक महत्वपूर्ण सवाल किया कि क्या दाऊदी बोहरा धर्मगुरु के निर्देशों का पालन न करने पर किसी प्रकार की सजा दी जाती है.

इस पर पाशा ने स्पष्ट किया कि इसका कोई सामाजिक या व्यावहारिक परिणाम नहीं होता. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे नमाज अनिवार्य होने के बावजूद उसे न पढ़ने पर कोई सजा नहीं मिलती, वैसे ही इस प्रथा का पालन न करने पर भी समुदाय से बाहर निकालने (बहिष्कार) का कोई प्रावधान नहीं है. पाशा ने जोर दिया कि दाऊदी बोहरा धर्म में इस प्रथा को न मानने पर न तो कोई धार्मिक प्रतिबंध है और न ही बहिष्कार का डर.

अधिवक्ता पाशा ने इस प्रथा की तुलना पुरुषों के खतना से की, जिस पर न्यायमूर्ति बागची ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के आधार पर पुरुषों के सरकमसीजन और फिमेल जेनिटल म्यूटिलेशन (mutilation) में बड़ा अंतर है.

पाशा ने इस पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कोई विकृति नहीं है बल्कि इसे पश्चिम में होने वाली हुडेक्टॉमी (hoodectomy) की तरह एक प्रक्रिया माना जाना चाहिए. जब न्यायमूर्ति नागरत्ना ने इस प्रथा के उद्देश्य के बारे में पूछा, तो पाशा ने उत्तर दिया कि इसका मकसद महिलाओं के यौन सुख (सेक्सुअल प्लेजर) को बढ़ाना है. इस तर्क पर न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह तो दावे के बिल्कुल विपरीत है.

न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने पाशा द्वारा इसकी तुलना पुरुषों के खतना से करने पर कड़ी आपत्ति जताई और उन्हें तथ्यों को सुधारने की सलाह दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही इस प्रथा को न मानने पर बहिष्कार न किया जाता हो, लेकिन चूंकि इसे एक अनिवार्य धार्मिक प्रथा माना जाता है इसलिए अदालत के लिए इसकी गहन जांच करना आवश्यक है.

आपको बता दें कि इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ (जिसमें जस्टिस नागरत्ना, सुंदरेश, अमनुल्लाह, कुमार, मसीह, वराले, महादेवन और बागची शामिल हैं) कर रही है.

Source: AajTak
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सांप के जहर से यूं निकला था हाई बीपी की दवा का फार्मूला
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सांप के जहर से यूं निकला था हाई बीपी की दवा का फार्मूला

ब्राजील के जहरीले सांप Bothrops jararaca के जहर पर हुई रिसर्च की मदद से एक दवा बनाने की राह बनी. वैज्ञानिकों ने सांप के जहर में मौजूद ब्रैडीकिनिन-पोटेंशियेटिंग पेप्टाइड्स के बारे मे रिसर्च की और उससे प्रेरणा लेकर Captopril दवा विकसित हुई. बारिश के इस मौसम में देशभर के कई जिलों से सांप काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं. इनमें कुछ लोगों की मौत भी हो गई है. सांप के जहर

5 days ago

मॉडर्ना और मर्क की MRNA थेरेपी ने मेलानोमा स्किन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाई है. फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में यह थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सफल रही है.
विज्ञान
दोबारा कैंसर फैलने से रोका जा सकेगा

मॉडर्ना और मर्क की MRNA थेरेपी ने मेलानोमा स्किन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाई है. फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में यह थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सफल रही है. कैंसर की सर्जरी सफल हो जाने के बाद भी मरीज और डॉक्टरों के सामने एक बड़ा डर बना रहता है. कहीं बीमारी दोबारा वापस न आ जाए. खासकर स्किन कैंसर जिसे मेलानोमा कहते हैं

5 days ago

टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है.
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मसूरी-कैंपटी रूट पर भारी बारिश का कहर

टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-707A पर भारी बारिश के कारण डिमटा बैंड के पास सड़क वॉशआउट हो गई है. मसूरी-कैंपटी-यमुना ब्रिज मार्ग का बड़ा हिस्सा

5 days ago

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे
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बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
विज्ञान
दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
विज्ञान
कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
विज्ञान
चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
विज्ञान
पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से
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21वीं सदी के अंत बढ़ेगा पारा

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक और स्थानीय जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इसका गंभीर असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है.

6 days ago

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों
विज्ञान
चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट क्रैश

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था. नासा ने चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को लीं.

6 days ago

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ
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144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ दिनों तक सावधानी बरतने की जरूरत है. मध्य भारत में बारिश अभी कुछ दिन और जारी रह सकती है. अगले 144 घंटे यानी करीब 6 दिनों के मौसम अनुमान के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश,

6 days ago