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दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई नया H1N1 स्ट्रेन आया है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौसमी बदलाव के कारण वायरस सक्रिय हो रहा है. राजधानी दिल्ली समेत अब देश क कई दूसरे इलाकों में भी स्वाइन फ्लू के केस बढ़ने लगे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस वायरस का कोई नया स्ट्रेन आ गया है जो तेजी
Swine Flu vaccination : दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं, कई मरीजों में तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कोई वैक्सीन है. अगर है तो ये कब लगती है और कौन- कौन इसको लगवा सकता है.Swine Flu vaccination : दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं,
चांद को अब तक शांत और ठंडी दुनिया माना जाता रहा है, लेकिन नई खोज उसके पुराने इतिहास की अलग तस्वीर दिखाती है. वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर दो विशाल ज्वालामुखीय ढांचे खोजे हैं, जो अरबों साल पहले की ज्वालामुखीय गतिविधि के सबूत देते हैं. चांद को देखकर लगता है कि वहां लंबे समय से सब कुछ शांत है. लेकिन वैज्ञानिकों को मिले नए सबूत बताते हैं कि अरबों साल
भारत में मॉनसून बेतरतीब और कमजोर पड़ रहा है. IMD ने अगले दो हफ्तों में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी की है. IOD न्यूट्रल है. खरीफ फसलों पर खतरा बढ़ रहा है. अगस्त 2026 के अंत में भारत का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर और बेतरतीब पैटर्न दिखा रहा है. यूरोप में असामान्य बारिश जारी रहने का अनुमान है, लेकिन भारत में बार-बार होने वाले इंट्रासीजनल ब्रेक (मॉनसून
हिंदुकुश हिमालय में होने वाला पर्यावरणीय परिवर्तन किसी एक देश की समस्या नहीं है. यह पूरे दक्षिण एशिया की जल, खाद्य और पारिस्थितिक सुरक्षा का प्रश्न है. अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक आकलन संकेत देते हैं कि एशिया में तापमान बढ़ने के साथ हिमनदों के पिघलने, बाढ़ और सूखे का जोखिम बढ़ रहा है.हिंदुकुश हिमालय में होने वाला पर्यावरणीय परिवर्तन किसी एक देश
प्रशांत महासागर में बन रहा अल-नीनो इस बार बेहद ताकतवर हो सकता है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका असर दुनिया के तापमान, बारिश और मौसम पर पड़ेगा और 2026-27 में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं. साल 2026 में दुनिया को एक और बड़ी गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर में बन रहा अल-नीनो इस बार बहुत मजबूत हो सकता है, इतना
1992 में स्विस आल्प्स में लापता हुए दो पर्वतारोहियों का 34 साल बाद पता चला. ग्लेशियर पिघलने पर दोनों के शव मिले और DNA जांच से पहचान हुई. बर्फ में इतने सालों से दबे इस मामले ने सबको चौंका दिया. स्विट्जरलैंड के आल्प्स में 1992 में लापता हुए दो बेल्जियन पर्वतारोहियों के शव 34 साल बाद मिले हैं. 26 जुलाई को एक हाइकर को ट्रिफ्ट ग्लैशियर पर दो शव दिखाई दिए. इसके बाद
तपती जलती गर्मी का मौसम आया

तपती जलती गर्मी का मौसम आया, अपने साथ 'सुपर अल नीनो' लाया... आपके लिए ये हैं खतरे
2026 का गर्मी का मौसम भारत में रिकॉर्ड तोड़ने वाला होगा. अप्रैल 2024 से हर महीने तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया. IMD के अनुसार हिमालय, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट में मार्च-मई में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ेगी. सुपर अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज मुख्य कारण हैं. 52% कृषि भूमि और खुले में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
भारत में पिछले दो सालों से तापमान का सिलसिला रिकॉर्ड तोड़ रहा है. अप्रैल 2024 से हर महीने देश के किसी न किसी हिस्से में अधिकतम, न्यूनतम या औसत तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया है. सिर्फ मार्च 2025 में थोड़ी राहत मिली. अब 2026 का गर्मी का मौसम (मार्च से मई) और भी खतरनाक होने वाला है.
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि पहाड़ी इलाकों जैसे हिमालय, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट में इस बार गर्मी सामान्य से ज्यादा होगी. 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है. लाखों लोग खुले में काम करते हैं. ऐसे में यह गर्मी न सिर्फ सेहत को नुकसान पहुंचाएगी बल्कि फसलें, पानी और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी.
अप्रैल 2024 से जारी रिकॉर्ड गर्मी का सिलसिला
अप्रैल 2024 में दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत ने औसत तापमान का दूसरा सबसे ऊंचा रिकॉर्ड बनाया जबकि पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे ऊंचा रिकॉर्ड था. मई में पूर्व-पूर्वोत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में तीसरा सबसे ऊंचा औसत और अधिकतम तापमान दर्ज हुआ.
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जून में उत्तर-पश्चिम भारत ने सबसे ऊंचा अधिकतम तापमान और पूर्व-पूर्वोत्तर ने सबसे ऊंचा न्यूनतम तापमान देखा. जुलाई में पूरे देश ने दूसरा सबसे ऊंचा औसत तापमान बनाया. अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में पूरे देश ने सबसे ऊंचा न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया.
नवंबर में उत्तर-पश्चिम और दिसंबर में दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत ने नए रिकॉर्ड बनाए. 2025 में जनवरी में पूरे देश ने तीसरा सबसे ऊंचा अधिकतम तापमान और फरवरी में सबसे ऊंचा अधिकतम तापमान दर्ज किया. मार्च 2025 में राहत मिली लेकिन अब 2026 का गर्मी का मौसम पहले से भी ज्यादा गर्म होने की आशंका है. IMD के मंथली रिपोर्ट के अनुसार यह जलवायु संकट का स्पष्ट संकेत है जो हर मौसम को प्रभावित कर रहा है.
जलवायु परिवर्तन और अल-नीनो-ला नीना का प्रभाव
तापमान बढ़ने के पीछे मुख्य कारण इंसानों द्वारा किए जा रहा क्लाइमेट चेंज है. दुनिया भर में औसत सतह तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस ऊपर जा चुका है. फरवरी 2025 तक पिछले 20 महीनों में से 19 महीने इस सीमा को पार कर चुके थे. भारत में भी गर्मी की रफ्तार तेज हुई है.
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पिछले साल गर्मी बढ़ी लेकिन भारत की गर्मी की दर वैश्विक स्तर से कम रही. फिर भी जनवरी-फरवरी 2025 में रिकॉर्ड बने. विश्व मौसम संगठन (WMO) का कहना है कि 2023-2024 में गर्मी अपेक्षा से ज्यादा थी. इसका एक कारण एरोसोल (धूल कण) में कमी हो सकती है जो पहले सूरज की किरणों को रोकते थे. अब कम एरोसोल के कारण अधिक गर्मी पहुंच रही है.
अल-नीनो और ला नीना भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अल-नीनो प्रशांत महासागर में गर्म पानी का फेज है जो हवाओं को कमजोर कर देता है. इससे भारत में गर्मी बढ़ती है. मानसून कमजोर होता है. ला नीना ठंडा फेज है जो आमतौर पर ठंड लाता है लेकिन 2024 में ला नीना कमजोर था.
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मई 2024 में अल-नीनो खत्म हुआ लेकिन दिसंबर 2024 से कमजोर ला नीना शुरू हुआ. फिर भी भारत में दिसंबर, जनवरी और फरवरी में रिकॉर्ड गर्मी रही. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये प्राकृतिक घटनाएं अब इंसानों द्वारा किए जा रहे ग्लोबल वार्मिंग के ऊपर सवार हो रही हैं.
2026 में सुपर अल-नीनो का खतरा: क्यों होगा गर्मी का कहर?
NOAA और ECMWF के मुताबिर जून-अगस्त 2026 में अल-नीनो बनने की 62 प्रतिशत संभावना है. यह अगस्त-अक्टूबर तक 80 प्रतिशत तक बढ़ सकती है. कई मॉडल इसे सुपर अल-नीनो बता रहे हैं जिसमें समुद्र की सतह का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर रहेगा.
पिछली सुपर अल-नीनो 2015-16, 1997-98 और 1982-83 में आए थे. इनमें वैश्विक तापमान का रिकॉर्ड बना, सूखा पड़ा और मानसून प्रभावित हुआ. 2026 का सुपर अल-नीनो भारत में गर्मी बढ़ाएगा, मानसून को कमजोर करेगा और पहाड़ी इलाकों में सूखा-आग का खतरा बढ़ाएगा. ECMWF मॉडल के अनुसार जून-सितंबर में मानसून के ब्रेक फेज में 2-5 डिग्री ऊपर तापमान रहने की संभावना है.
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भयंकर गर्मी: हिमालय, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट पर खतरा
मार्च-अप्रैल-मई 2026 के मौसमी पूर्वानुमान के अनुसार पूरे देश में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहेगा. खासकर हिमालय, पूर्वोत्तर राज्य और पश्चिमी घाट के पहाड़ी हिस्सों में यह सबसे ज्यादा होगा. जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाके और उत्तराखंड के ऊंचे इलाकों में दिन और रात दोनों का तापमान ऊंचा रहेगा.
पूर्वोत्तर भारत में भी और पश्चिमी घाट के तटीय कर्नाटक-महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा संभावना है. IMD ने पूर्व, पूर्व-मध्य, दक्षिण-पूर्व प्रायद्वीप और कुछ उत्तर-पश्चिम-मध्य भारत में बड़ी संख्या में हीटवेव दिनों की चेतावनी दी है. सूखी सर्दियों के बाद गर्मी बढ़ने से सूखा, जंगल की आग और पानी की कमी बढ़ेगी. पहाड़ी इलाकों में जनवरी-फरवरी में ही असामान्य आग लगी थी.
कृषि, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा
भारत में 52 प्रतिशत कृषि भूमि सिंचाई पर निर्भर है. गर्मी फसलों के लगने का साइकिल बिगाड़ेगी, उत्पादकता घटाएगी और महंगाई बढ़ाएगी. खुले में काम करने वाले लोग, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार व्यक्ति सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. IMD ने कहा है कि बढ़ी हुई गर्मी से हीटस्ट्रोक, पानी की कमी और बिजली की मांग बढ़ेगी.
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पहाड़ी इलाकों में लोग गर्मी के आदी नहीं हैं इसलिए एडजस्ट करना मुश्किल होगा. WMO चेतावनी देता है कि अल-नीनो-ला नीना अब जलवायु संकट के साथ मिलकर मौसम पैटर्न को और बिगाड़ रहे हैं. IMD ने राज्य सरकारों से कहा है कि कूलिंग सेंटर, पीने का पानी और स्वास्थ्य निगरानी तैयार रखें.
2026 का गर्मी का मौसम 2024-25 की गर्मी से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है क्योंकि सुपर अल-नीनो का प्रभाव जोड़ रहा है. अब समय है कि हम तैयार हों - पानी बचाएं, पेड़ लगाएं और जलवायु अनुकूल खेती अपनाएं. यह सिर्फ मौसम नहीं बल्कि जलवायु संकट की नई चेतावनी है.
Source: AajTak
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