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तापमान कम करने वाली चीन की यह तकनीक कैसे करती है काम

Posted By: Jaydatt Chaudhary Posted On: Jul 03, 2026Share Article
तापमान कम करने वाली चीन की यह तकनीक कैसे करती है काम
चीन की इमारत के ऊपर मिस्ट कूलिंग सिस्टम लगा हुआ है. (Photo: X/GlobalEye)

गर्मी से राहत का नया तरीका! तापमान कम करने वाली चीन की यह तकनीक कैसे करती है काम?

हीटवेव और बढ़ते तापमान के बीच खुले इलाकों को ठंडा रखने वाली मिस्ट कूलिंग तकनीक चर्चा में है. जानिए यह सिस्टम कैसे काम करता है और इसे गर्मी से राहत का नया ऑप्शन क्यों माना जा रहा है.

दुनियाभर में बढ़ती हीटवेव और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच चीन में तापमान कम करने की एक नई तकनीक चर्चा में है. कई रिहायशी इमारतों की छतों पर रूफटॉप मिस्ट कूलिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दावा किया गया है कि यह सिस्टम कुछ ही मिनटों में आसपास का तापमान 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक कम कर सकता है. हालांकि इन वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है. यह तकनीक खुले इलाकों को ठंडा रखने के लिए बनाई गई है और कम बिजली में गर्मी से राहत देने वाले ऑप्शन के तौर पर देखी जा रही है.

क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया के कई देशों में हीटवेव पहले से ज्यादा लंबी और तेज हो रही है. बड़े शहरों में कंक्रीट की इमारतें, डामर की सड़कें और कम हरियाली गर्मी को देर तक रोककर रखती हैं. इसी कारण दिन के साथ-साथ रात में भी तापमान ज्यादा बना रहता है. ऐसे में वैज्ञानिक और इंजीनियर ऐसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं जो कम एनर्जी खर्च करके खुले इलाकों को ठंडा रख सकें.

यह भी पढ़ें: भारत के प्राइवेट स्पेस सेक्टर ने रचा इतिहास, लॉन्च पैड पर पहुंचा विक्रम-1 रॉकेट

चीन में इस्तेमाल हो रहा रूफटॉप मिस्ट कूलिंग सिस्टम इसी दिशा में एक तकनीक है. इसे कैफे, रेस्टोरेंट, टैरेस, गार्डन, वेयरहाउस, बस स्टॉप और खुले कार्यक्रमों वाली जगहों पर लगाया जा रहा है. इसका मकसद पूरे इलाके को एयर कंडीशन करना नहीं, बल्कि आसपास की हवा का तापमान कुछ डिग्री कम करना है.

तापमान कम करने का साइंस क्या है?

इस तकनीक का आधार इवैपोरेटिव कूलिंग है. सिस्टम में लगे हाई-प्रेशर नोजल हवा में पानी की बहुत बारीक बूंदें छोड़ते हैं. ये बूंदें इतनी छोटी होती हैं कि जमीन पर गिरने से पहले ही भाप बनने लगती हैं. पानी को भाप बनने के लिए गर्मी चाहिए होती है. यह गर्मी वह आसपास की हवा से लेता है.

जैसे-जैसे पानी भाप बनता है, हवा की गर्मी कम होती जाती है और आसपास का तापमान नीचे आने लगता है. यही वजह है कि लोगों को ठंडक महसूस होती है. यही प्रक्रिया हमारे शरीर में भी होती है. पसीना सूखते समय शरीर की गर्मी अपने साथ ले जाता है, इसलिए शरीर ठंडा महसूस करता है.

क्या यह एयर कंडीशनर जैसा है?

नहीं. यह सामान्य एयर कंडीशनर की तरह कमरे की हवा को ठंडा नहीं करता. एसी बंद कमरे में कंप्रेसर और रेफ्रिजरेंट गैस की मदद से तापमान घटाता है. वहीं मिस्ट कूलिंग सिस्टम सिर्फ खुले या आधे खुले इलाकों में हवा का तापमान कुछ डिग्री कम करता है. इसलिए इसे आउटडोर कूलिंग सिस्टम कहा जाता है, न कि ट्रेडिशनल एसी.

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क्या हर जगह 5-8°C तापमान कम होगा?

ऐसा जरूरी नहीं है. वायरल वीडियो में 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक तापमान घटने का दावा किया गया है. लेकिन इसका असर मौसम और हवा की नमी पर निर्भर करता है. अगर हवा सूखी हो तो पानी जल्दी भाप बनता है और कूलिंग ज्यादा होती है. वहीं अगर नमी पहले से ज्यादा हो, तो पानी धीरे-धीरे भाप बनता है और तापमान कम होने का असर भी कम हो सकता है.

शहरों में क्यों बढ़ रही है इसकी जरूरत?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, बड़े शहरों में अर्बन हीट आइलैंड इफेक्ट की वजह से तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से ज्यादा रहता है. कंक्रीट की इमारतें और सड़कें दिनभर गर्मी सोखती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती हैं. ऐसे में खुले इलाकों में मिस्ट कूलिंग सिस्टम लोगों को कुछ राहत दे सकता है. यह तकनीक ट्रेडिशनल एयर कंडीशनर की तुलना में कम बिजली खर्च करती है और खुले जगाहों के लिए ज्यादा उपयोगी मानी जाती है.

मिस्ट कूलिंग सिस्टम एयर कंडीशनर का ऑप्शन नहीं है, लेकिन खुले इलाकों में तापमान कुछ डिग्री कम करने का एक वैज्ञानिक तरीका जरूर है. बढ़ती हीटवेव और गर्म शहरों की चुनौती को देखते हुए दुनिया के कई देशों में ऐसी कूलिंग तकनीकों पर काम हो रहा है. अगर स्थानीय मौसम और जरूरत के हिसाब से इनका इस्तेमाल किया जाए, तो फ्यूचर में ये गर्मी से राहत देने का एक उपयोगी ऑप्शन बन सकती हैं.

Source: AajTak
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दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
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कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
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चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
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पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से
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21वीं सदी के अंत बढ़ेगा पारा

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक और स्थानीय जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इसका गंभीर असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है.

6 days ago

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों
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चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट क्रैश

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था. नासा ने चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को लीं.

6 days ago

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ
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144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ दिनों तक सावधानी बरतने की जरूरत है. मध्य भारत में बारिश अभी कुछ दिन और जारी रह सकती है. अगले 144 घंटे यानी करीब 6 दिनों के मौसम अनुमान के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश,

6 days ago