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मुंह में जहां जख्म होता है वहीं बार-बार क्यों जाती है जीभ

मुंह में जहां जख्म होता है वहीं बार-बार क्यों जाती है जीभ
मुंह में छाला या दांत में कुछ फंसते ही जीभ बार-बार उसी जगह पहुंच जाती है. इसके पीछे सिर्फ आदत नहीं, बल्कि जीभ, नसों और दिमाग के बीच होने वाला एक वैज्ञानिक तालमेल काम करता है.
मुंह में छाला होने पर या कुछ फंसा होने पर अक्सर जीभ बार-बार उसी जगह चली जाती है. कई बार हम खुद भी चाहते हैं कि जीभ घाव को न छुए, लेकिन फिर भी वह अनजाने में वहीं पहुंच जाती है. आखिर ऐसा क्यों होता है? क्या यह सिर्फ आदत है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह हमारी जीभ की बनावट, मुंह की नसें और दिमाग के काम करने के तरीके में छिपी है.
जीभ हमारे शरीर के सबसे सेंसेटिव ऑर्गन में से एक है.यह सिर्फ स्वाद पहचानने का काम नहीं करती, बल्कि मुंह के अंदर होने वाले हर छोटे बदलाव को भी महसूस करती है. इसी वजह से छाला, कट, सूजन या दांतों के बीच फंसी छोटी-सी चीज भी जीभ को तुरंत महसूस हो जाती है. अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के मुताबिक, जीभ में मौजूद सेंसरी नर्व एंडिंग्स दर्द, दबाव, तापमान और छूने जैसी संवेदनाओं को तुरंत दिमाग तक पहुंचाती हैं.
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जब मुंह में किसी जगह छाला या घाव बनता है, तो वहां की नसें लगातार दिमाग को संकेत भेजती रहती हैं. दिमाग उस हिस्से को सामान्य जगह से अलग पहचान लेता है. यही वजह है कि जीभ अनजाने में बार-बार उसी जगह पहुंच जाती है. यह किसी बीमारी का लक्षण नहीं, बल्कि शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है. इसी कारण दांतों के बीच कुछ फंसने पर भी जीभ सबसे पहले उसी जगह जाती है.
जीभ हर समय मुंह के अंदर बदलाव महसूस करती रहती है
जीभ पूरे दिन मुंह के अंदर लगातार घूमती रहती है. हम जब बोलते हैं, खाना खाते हैं, पानी पीते हैं या निगलते हैं. तब भी जीभ मुंह की अलग सतहों को छूती रहती है. अगर कहीं छाला, कट या सूजन हो जाए, तो वहां की सतह बाकी हिस्सों से अलग महसूस होती है. इसलिए जीभ बार-बार उसी जगह पहुंच जाती है. यह पूरी प्रक्रिया बिना सोचे-समझे होती है और हमारे नियंत्रण में नहीं होती.
अगर दांतों के बीच कोई छोटा-सा कण फंस जाए, तब भी जीभ उसी जगह बार-बार जाती है. इसकी वजह यह है कि मुंह की नसें उस बदलाव को तुरंत पहचान लेती हैं. जीभ उस हिस्से को महसूस करती रहती है. कई बार फंसी हुई चीज को हटाने की कोशिश भी करती है. डॉक्टर इसे शरीर का सामान्य सुरक्षा तंत्र मानते हैं, जिससे मुंह के अंदर होने वाले बदलाव का पता चलता रहता है.
क्या बार-बार जीभ लगाने से घाव भरने में देर हो सकती है?
ओरल हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर जीभ लगातार छाले या घाव को रगड़ती रहे, तो वहां जलन और परेशानी बढ़ सकती है. कुछ मामलों में इससे घाव भरने में थोड़ा ज्यादा समय भी लग सकता है. ज्यादातर सामान्य मुंह के छाले 7 से 14 दिनों के भीतर अपने आप ठीक हो जाते हैं.
अगर छाला तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, बार-बार निकलता हो, बहुत बड़ा हो जाए या उसके साथ तेज दर्द, बुखार या निगलने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर या डेंटिस्ट से जांच करानी जरूरी है.
जैसे-जैसे छाला या घाव ठीक होने लगता है, वहां की सूजन और दर्द भी कम होने लगता है. इसके साथ ही उस हिस्से से दिमाग तक जाने वाले सिग्नल भी पहले की तुलना में कम हो जाते हैं. जब मुंह का वह हिस्सा फिर से सामान्य हो जाता है, तो जीभ को भी वहां कुछ अलग महसूस नहीं होता. यही वजह है कि कुछ दिनों बाद जीभ का बार-बार उसी जगह जाना अपने आप बंद हो जाता है.
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नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) के मुताबिक, जीभ मुंह के अंदर होने वाले बदलावों को लगातार महसूस करती रहती है. जब बदलाव खत्म हो जाता है, तो उस हिस्से पर बार-बार ध्यान जाने की वजह भी खत्म हो जाती है. इसलिए घाव भरने के बाद जीभ का व्यवहार भी सामान्य हो जाता है.
क्या यह शरीर का सामान्य सिक्योरिटी सिस्टम है?
मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जीभ का बार-बार घाव वाली जगह जाना शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है. इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर जानबूझकर घाव की जांच कर रहा है या उसे जल्दी ठीक करने की कोशिश कर रहा है. दरअसल, मुंह की नसों से मिलने वाले सिग्नल और जीभ की सेंसिटिविटी मिलकर ऐसी स्थिति बनाते हैं कि जीभ अनजाने में उसी हिस्से तक पहुंच जाती है.
इसी तरह अगर दांतों के बीच कोई छोटा-सा कण फंस जाए, दांत का किनारा नुकीला हो या मुंह के अंदर कोई नई रुकावट आ जाए, तो जीभ उसे भी तुरंत महसूस कर लेती है. यही शरीर का तरीका है, जिससे मुंह के अंदर होने वाले बदलावों की जानकारी लगातार दिमाग तक पहुंचती रहती है.
क्या हर छाले पर चिंता करने की जरूरत होती है?
ज्यादातर मामलों में मुंह का छाला सामान्य होता है और बिना इलाज के ठीक हो जाता है. लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. अगर छाला तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक बना रहे, उसका आकार लगातार बढ़ता जाए, उसमें से खून आने लगे या खाना निगलने में दिक्कत होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर या डेंटिस्ट से सलाह लेनी चाहिए.
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार बने रहने वाले छाले कभी-कभी संक्रमण, पोषण की कमी या दूसरी बीमारियों का संकेत भी हो सकते हैं. इसलिए लंबे समय तक रहने वाले या बार-बार होने वाले छालों की जांच कराना जरूरी होता है. समय पर जांच कराने से सही कारण का पता लगाया जा सकता है. इलाज भी जल्दी शुरू हो सकता है.
मुंह में छाला होने पर जीभ का बार-बार उसी जगह जाना किसी बीमारी का संकेत नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह जीभ की सेंसिटिविटी, मुंह की नसों से मिलने वाले संकेत और दिमाग का उस हिस्से पर लगातार ध्यान देना है. इसलिए अगर जीभ बार-बार छाले या दांत में फंसी चीज की तरफ जाती है, तो समझिए कि आपका शरीर मुंह के अंदर हुए छोटे-से बदलाव को महसूस कर रहा है. यही शरीर का सामान्य और वैज्ञानिक तरीका है, जिससे वह मुंह की स्थिति पर नजर बनाए रखता है. रिपोर्टः साक्षी प्रजापति
Source: AajTak
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