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हीट मैप में लाल क्यों होता जा रहा इंडिया वाला हिस्सा? वैज्ञानिक चेता रहे खौफनाक हालात के लिए
भारत इन दिनों पृथ्वी का सबसे बड़ा गर्म इलाका बन गया है. दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 95 भारत में हैं. उत्तर-पूर्वी भारत में अप्रैल में ही 43-47°C तापमान है. मौसम मॉडल बता रहे हैं कि 2026 में सुपर अल-नीनो आ सकता है, जो सबसे मजबूत होगा. इससे कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ आएगी. रिकॉर्ड गर्मी बढ़ेगी. वैज्ञानिकों ने तैयार रहने की चेतावनी दी है.
भारत इन दिनों पृथ्वी का सबसे बड़ा गर्म इलाका बन गया है और यह बात किसी से छिपी नहीं है. अप्रैल में ही मई-जून वाली गर्मी पड़ रही है. फील भी हो रही है. दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में से 95 भारत में हैं. उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बड़े हिस्सों में अप्रैल में ही 43 से 47 डिग्री सेल्सियस तक तापमान पहुंच गया है.
आमतौर पर इतनी तेज गर्मी जून-जुलाई में आती है लेकिन इस बार यह बहुत पहले शुरू हो गई है. वैज्ञानिक कहते हैं कि समुद्र की सतह का तापमान बढ़ने और हवा के दबाव में बदलाव के कारण यह हो रहा है.
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पृथ्वी पर इंसानों द्वारा पैदा की जा रही ग्रीनहाउस गैसों से तापमान बढ़ रहा है जिससे छोटी-छोटी गर्म हवाओं की लहरें भी बहुत तेज और लंबी हो जाती हैं. इस समय बाकी दुनिया के ज्यादातर इलाके ठंडे हैं लेकिन भारत में गर्मी इतनी ज्यादा है कि लोग दिन में घर से निकलने में भी डर रहे हैं.
क्या सुपर अल-नीनो आने वाला है?
मौसम के वैज्ञानिक मॉडल अब साफ-साफ बता रहे हैं कि 2026 के बाद के महीनों में एक बहुत मजबूत अल-नीनो बनने वाला है. इसे कुछ लोग सुपर अल-नीनो या गॉडजिला अल-नीनो भी कह रहे हैं. ब्रिटेन के मौसम विभाग के एडम स्केफ कहते हैं कि पिछले एक महीने में ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर में तापमान इतनी तेजी से बढ़ रहा है जितना इस सदी में पहले कभी नहीं बढ़ा.
विश्व मौसम संगठन (WMO) ने भी अप्रैल 2026 में चेतावनी दी है कि मई से जुलाई 2026 तक अल-नीनो शुरू हो सकता है. यह और मजबूत होता जाएगा. अभी शुरुआत में समुद्र की सतह का तापमान औसत के आसपास है लेकिन अंदरूनी पानी पहले से गर्म हो चुका है जो अल-नीनो का मुख्य संकेत है. वैज्ञानिक कहते हैं कि अप्रैल के बाद भविष्यवाणी ज्यादा सटीक हो जाती है क्योंकि वसंत का मौसम भविष्य बताने में थोड़ा मुश्किल होता है.
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अल-नीनो क्या है, वैज्ञानिक कारण क्या हैं?
अल-नीनो और ला नीना पृथ्वी की सबसे बड़ी जलवायु लहरों में से एक हैं जिन्हें वैज्ञानिक एन्सो (ENSO) यानी अल-नीनो-सदर्न ऑसिलेशन कहते हैं. अल-नीनो तब होता है जब मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है.
A planet-warming El Niño climate phase is now developing, and some models predict it could turn out to be the strongest on record https://t.co/WaVetKoALX
सामान्य दिनों में पूर्वी प्रशांत में ठंडा पानी ऊपर आता रहता है. हवा पूर्व से पश्चिम की ओर चलती है. लेकिन जब अल-नीनो आता है तो हवा कमजोर हो जाती है या उल्टी दिशा में चलने लगती है. गर्म पानी फैल जाता है. इससे पूरी दुनिया की हवा और बारिश का पैटर्न बदल जाता है.
वैज्ञानिक कारण यह है कि गर्म पानी से हवा ऊपर उठती है जिससे आसपास के इलाकों में कम दबाव बनता है. बारिश बढ़ जाती है. वहीं दूर के इलाकों में सूखा पड़ जाता है. ला नीना इसके उलट होता है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी ठंडा हो जाता है. अल-नीनो हर दो से सात साल में आता है और नौ से बारह महीने तक रहता है.
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पिछले महीनों में मौसम के मॉडलों ने क्या बताया?
अप्रैल 2026 के शुरू में कई बड़े मौसम केंद्रों ने कहा कि 2025-26 की ला-नीना खत्म हो चुकी है. अब न्यूट्रल स्थिति है. लेकिन मॉडल दिखा रहे हैं कि गर्मियों और सर्दियों में अल-नीनो आएगा. ऑस्ट्रेलिया के मौसम विभाग, जापान की मौसम एजेंसी, अमेरिका की नोआ और ब्रिटेन के मेट ऑफिस सभी एकमत हैं कि यह मजबूत अल-नीनो हो सकता है.
सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण समुद्र के अंदर गर्म पानी का बढ़ना है. यह गर्म पानी ऊपर आकर सतह को गर्म करता है और पूरी वातावरण को बदल देता है. WMO के प्रमुख मौसम वैज्ञानिक विल्फ्रान मुफौमा ओकिया कहते हैं कि मॉडल अब बहुत ज्यादा सही हैं और विश्वास है कि अल-नीनो आएगा.
For the May-June-July season, above-normal land surface temperatures are expected nearly everywhere, esp. over southern North & Central America, the Caribbean, Europe & Northern Africa. Rainfall predictions show strong regional variations.
To the update➡️https://t.co/NYupOnDpRO pic.twitter.com/qrOQnhj7nR
अल-नीनो के सामान्य प्रभाव क्या होंगे?
अल-नीनो पूरी दुनिया का मौसम बदल देता है. वैज्ञानिक कारण यह है कि प्रशांत महासागर का गर्म पानी ऊर्जा बढ़ाता है जो हवा और नमी को बढ़ाता है. इससे कुछ जगहों पर भारी बारिश और बाढ़ आती है तो कुछ जगहों पर सूखा पड़ता है. सामान्य प्रभाव यह हैं – दक्षिण अमेरिका के दक्षिणी हिस्से, अमेरिका के दक्षिणी राज्यों, अफ्रीका के हॉर्न वाले इलाके और मध्य एशिया में ज्यादा बारिश होती है.
वहीं ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में सूखा. भारत में भी मानसून कमजोर हो सकता है जिससे कृषि पर असर पड़ेगा. गर्मी भी बढ़ जाती है क्योंकि अल-नीनो पूरी पृथ्वी को गर्म करता है. 2024 सबसे गर्म साल इसलिए बना क्योंकि 2023-24 का अल-नीनो और मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन दोनों साथ थे.
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भारत और दुनिया पर होने वाला असर
अगर यह सुपर अल-नीनो बना तो भारत में मानसून की बारिश अनियमित हो सकती है. वैज्ञानिक कहते हैं कि दक्षिण एशिया में सूखा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है. उत्तर और पूर्वी भारत में पहले से ही गर्मी है तो अल-नीनो इसे और बढ़ा सकता है. दुनिया में सूखा ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया को परेशान करेगा जबकि दक्षिण अमेरिका और पूर्वी अफ्रीका में बाढ़ आ सकती है.
प्रशांत महासागर में तूफान बढ़ेंगे लेकिन अटलांटिक में कम होंगे क्योंकि अल-नीनो अटलांटिक में तूफान बनाने वाली हवाओं को रोकता है. WMO कहता है कि मई-जून-जुलाई में लगभग हर जगह जमीन का तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा. यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और कैरिबियन में यह और भी ज्यादा होगा.
जलवायु परिवर्तन से अल-नीनो का संबंध
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन अल-नीनो की संख्या या ताकत नहीं बढ़ाता. लेकिन गर्म समुद्र और गर्म हवा होने से इसके प्रभाव ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं. ज्यादा ऊर्जा और नमी होने से लू की लहरें तेज हो जाती हैं. भारी बारिश एकदम ज्यादा हो जाती है. इसलिए अल-नीनो के साथ-साथ मानव-निर्मित ग्रीनहाउस गैसें मिलकर पृथ्वी को और गर्म बनाती हैं. WMO कहता है कि अल-नीनो हर बार अलग होता है लेकिन इस बार तैयारी पहले से करनी होगी.
तैयारी और सावधानियां क्यों जरूरी हैं?
किसान, पेयजल और सिंचाई विभाग, स्वास्थ्य विभाग और सरकारें अब से ही तैयार रहें तो नुकसान कम हो सकता है. डब्ल्यूएमओ 28 अप्रैल को दक्षिण एशियाई मानसून का पूर्वानुमान जारी करेगा. 29 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र और मानवीय संगठनों को पूरी जानकारी दी जाएगी.
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किसान सूखा-रोधी फसल बोएं, पानी बचाएं और स्वास्थ्य विभाग लू से बचाव के कार्यक्रम चलाएं. अल-नीनो के बाद ला नीना भी आ सकता है इसलिए लंबी तैयारी जरूरी है. वैज्ञानिक कहते हैं कि सही जानकारी और समय पर कार्रवाई से लाखों लोगों की जान और फसल बचाई जा सकती है.
यह अल-नीनो अगर सुपर बना तो 2026 या 2027 पृथ्वी का सबसे गर्म साल बन सकता है. इसलिए हर देश को अभी से ही सतर्क रहना होगा. भारत में गर्मी पहले ही चरम पर है तो आने वाले महीनों में और सावधानी बरतनी पड़ेगी. वैज्ञानिक मॉडल लगातार निगरानी कर रहे हैं और अगली अपडेट मई के अंत में आएगी.
Source: AajTak
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