उत्तराखंड पेपर लीक केस: मुख्य आरोपी खालिद की दुकान पर चला बुलडोजर

उत्तराखंड पेपर लीक केस: मुख्य आरोपी खालिद की दुकान पर चला बुलडोजर
एसपी देहात शेखर सुयाल की अगुवाई में बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. जैसे ही बुलडोज़र ने दुकान को तोड़ना शुरू किया, स्थानीय लोग घटनास्थल पर खड़े होकर पूरे मंजर को देखते रहे. राज्य सरकार ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. इस टीम की निगरानी एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज कर रहे हैं. SIT को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं.
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षा में पेपर लीक प्रकरण के मुख्य आरोपी खालिद के खिलाफ धामी सरकार ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की. हरिद्वार के लक्सर स्थित सुल्तानपुर कस्बे में खालिद की दुकान को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया. इस कार्रवाई को लेकर इलाके में पूरे दिन चर्चा बनी रही.
दरअसल, सुबह से ही प्रशासन ने कार्रवाई की तैयारी कर ली थी. एसपी देहात शेखर सुयाल की अगुवाई में बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात रहा. ध्वस्तीकरण की कार्यवाही के दौरान आसपास के इलाके में सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए. जैसे ही बुलडोज़र ने दुकान को तोड़ना शुरू किया, स्थानीय लोग घटनास्थल पर खड़े होकर पूरे मंजर को देखते रहे.
सीएम धामी का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरुआत से ही यह साफ कर दिया था कि पेपर लीक मामले में दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा. धामी ने कहा था कि “भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर सरकार पूरी सख्ती से प्रहार करेगी.”
युवाओं का गुस्सा और आंदोलन
पेपर लीक मामले ने राज्यभर के युवाओं में गुस्सा भर दिया है. बेरोजगार संघ की अगुवाई में छात्र देहरादून के परेड ग्राउंड में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं. उनकी मांग है कि पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए, आयोग के अध्यक्ष को बर्खास्त किया जाए और भर्ती नियमों में संशोधन हो.
हालांकि, मुख्यमंत्री धामी ने साफ किया है कि सीबीआई जांच की मांग भर्ती प्रक्रिया को बाधित करने का षड्यंत्र है. उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच में कई साल लग जाते हैं, जिससे भर्ती परीक्षाएं ठप हो जाती हैं.
SIT जांच जारी
राज्य सरकार ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है. इस टीम की निगरानी एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज कर रहे हैं. SIT को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. सरकार का दावा है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी तथा दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
विपक्ष का हमला
कांग्रेस समेत विपक्षी दल इस मामले को लेकर लगातार राज्य सरकार पर हमला कर रहे हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार युवाओं को न्याय नहीं दे पा रही और SIT गठन से वास्तविकता छिपाई जा रही है. शुक्रवार को कांग्रेस ने घोषणा की कि पूरे राज्य के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा.
Source: AajTak
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