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रेगिस्तान की धूल आई, गर्म और ठंडी हवा की हुई टक्कर... ऐसे धुंध में डूबा दिल्ली-NCR

Posted By: Hemant Kumar Posted On: Apr 03, 2026Share Article
रेगिस्तान की धूल आई
मार्च-अप्रैल में कई बार धूल भरी आंधी का सामना करना पड़ा है दिल्ली-NCR को. ये असल में रेगिस्तान की धूल है. (File Photo: Getty)

रेगिस्तान की धूल आई, गर्म और ठंडी हवा की हुई टक्कर... ऐसे धुंध में डूबा दिल्ली-NCR

दिल्ली-NCR में शुक्रवार को आई तेज धूल भरी आंधी और धुंध का मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है. भूमध्य सागर से आने वाली ठंडी नम हवा गर्म सूखी हवा से टकराई, जिससे 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चलीं. राजस्थान के थार रेगिस्तान से भारी धूल उड़ी और दिल्ली तक पहुंच गई. इससे वायुमंडल अस्थिर हुआ. धूल के कण हवा में भर गए.

दिल्ली-NCR में शुक्रवार सुबह जो तेज धूल भरी आंधी आई, उसने पूरे इलाके को धुंध में डुबो दिया. आसमान अचानक धूल से भर गया. सूरज छिप गया और दिखना कम हो गया. लोग हैरान थे कि मार्च-अप्रैल में इतनी गर्मी के बाद अचानक यह बदलाव क्यों? भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिकों ने बताया कि इसके पीछे मुख्य वजह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है.

यह एक तरह का मौसमी सिस्टम है जो भूमध्य सागर से शुरू होकर पाकिस्तान और भारत की तरफ आता है. जब यह गर्म और सूखी हवा से टकराता है तो तेज हवाएं चलती हैं, जो राजस्थान के थार रेगिस्तान और पाकिस्तान के सूखे इलाकों से धूल उड़ा लाती हैं.

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वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दरअसल ठंडी और नम हवा का एक बड़ा सिस्टम है जो यूरोप और मध्य एशिया से आता है. अप्रैल 2026 में दो सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक साथ आए. इनकी वजह से 3 और 4 अप्रैल को दिल्ली-NCR में ज्यादा असर हुआ. हवाओं की रफ्तार 40-60 km/hr तक पहुंच गई. ये हवाएं पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से चलीं.

राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके से सूखी धूल उठी और दिल्ली तक पहुंच गई. गर्मी पहले से ज्यादा थी, जिससे जमीन गर्म हो चुकी थी. ऊपर की हवा में दबाव कम हो गया. जब ठंडी नम हवा नीचे आई तो वायुमंडल अस्थिर हो गया. नतीजा – तेज आंधी, धूल का गुबार और बाद में गरज-चमक के साथ बारिश. वैज्ञानिक कहते हैं कि गर्म हवा और ठंडी हवा का टकराव ही इस तरह की आंधी पैदा करता है.

#WATCH | Delhi: In a sudden weather shift today, a dust storm has hit the national capital.

(Visuals from the India Gate) pic.twitter.com/Pw9zOktJlC

धुंध क्यों बनी और नजर क्यों कम हुई

धूल भरी आंधी के बाद जो धुंध छाई, वो सिर्फ धूल के छोटे-छोटे कणों की वजह से बनी. तेज हवाएं जमीन से बारीक धूल उठाती हैं. उसे निचले वायुमंडल में फैला देती हैं. ये कण हवा में लंबे समय तक रहते हैं क्योंकि उनका वजन बहुत कम होता है. जब हवा की रफ्तार थोड़ी कम हुई तो ये कण नीचे नहीं गिरे बल्कि हवा में ही तैरते रहे. नतीजा – आसमान धुंधला हो गया और विजिबिलिटी कम हो गई.

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आईएमडी ने बताया कि यह धुंध प्रदूषण नहीं बल्कि प्राकृतिक धूल से बनी है. कभी-कभी इसमें थोड़ी नमी भी मिल जाती है जो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस लाता है, तो धुंध और गाढ़ी हो जाती है. यही वजह है कि सुबह-शाम सूरज दिखना मुश्किल हो गया और सांस लेने में भी दिक्कत हुई.

मौसम का अचानक बदलाव क्यों हुआ

मार्च-अप्रैल में दिल्ली-NCR में पहले गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था. तापमान 35-37 डिग्री तक पहुंच गया था. अचानक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आया तो मौसम पूरी तरह पलट गया. गर्म हवा के ऊपर ठंडी हवा आने से वायुमंडल में बैलेंस बिगड़ गया. इससे बादल बने, हवाएं तेज हुईं और धूल उड़ी.

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह प्री-मानसून यानी मानसून से पहले का आम मौसम है. लेकिन इस बार गर्मी ज्यादा होने की वजह से बदलाव ज्यादा तेज हुआ. हवाएं 30-35 किलोमीटर प्रति घंटा से शुरू होकर 50-60 तक पहुंच गईं. इससे पहले भी मार्च 2026 में कई बार ऐसा हुआ था. मौसम विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्मी बढ़ने से जमीन पर लो प्रेशर यानी कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है, जो हवाओं को और तेज कर देता है.

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वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन भी इस तरह के मौसम में बदलाव को बढ़ा रहा है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से उत्तरी भारत में वसंत के मौसम में ही गर्मी जल्दी बढ़ रही है. इससे वायुमंडल अस्थिर हो जाता है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब पहले की तरह नहीं बल्कि ज्यादा तेजी से आ रहे हैं.

थार रेगिस्तान सूख रहा है. वहां से धूल उठाना आसान हो गया है. नतीजा – धूल भरी आंधी की घटनाएं बढ़ रही हैं. आईएमडी और दूसरे मौसम एजेंसियां कह रही हैं कि भविष्य में ऐसे अचानक बदलाव और ज्यादा हो सकते हैं. IMD ने 4 अप्रैल को दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया था. तेज हवाएं, धूल, गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है. इसके बाद मौसम थोड़ा स्थिर होगा लेकिन गर्मी फिर बढ़ेगी.

Source: AajTak
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टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-707A पर भारी बारिश के कारण डिमटा बैंड के पास सड़क वॉशआउट हो गई है. मसूरी-कैंपटी-यमुना ब्रिज मार्ग का बड़ा हिस्सा

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बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे
विज्ञान
बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
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दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
विज्ञान
कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
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चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
विज्ञान
पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago