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रेगिस्तान की धूल आई, गर्म और ठंडी हवा की हुई टक्कर... ऐसे धुंध में डूबा दिल्ली-NCR

रेगिस्तान की धूल आई, गर्म और ठंडी हवा की हुई टक्कर... ऐसे धुंध में डूबा दिल्ली-NCR
दिल्ली-NCR में शुक्रवार को आई तेज धूल भरी आंधी और धुंध का मुख्य कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है. भूमध्य सागर से आने वाली ठंडी नम हवा गर्म सूखी हवा से टकराई, जिससे 50-60 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाएं चलीं. राजस्थान के थार रेगिस्तान से भारी धूल उड़ी और दिल्ली तक पहुंच गई. इससे वायुमंडल अस्थिर हुआ. धूल के कण हवा में भर गए.
दिल्ली-NCR में शुक्रवार सुबह जो तेज धूल भरी आंधी आई, उसने पूरे इलाके को धुंध में डुबो दिया. आसमान अचानक धूल से भर गया. सूरज छिप गया और दिखना कम हो गया. लोग हैरान थे कि मार्च-अप्रैल में इतनी गर्मी के बाद अचानक यह बदलाव क्यों? भारतीय मौसम विभाग (IMD) के वैज्ञानिकों ने बताया कि इसके पीछे मुख्य वजह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है.
यह एक तरह का मौसमी सिस्टम है जो भूमध्य सागर से शुरू होकर पाकिस्तान और भारत की तरफ आता है. जब यह गर्म और सूखी हवा से टकराता है तो तेज हवाएं चलती हैं, जो राजस्थान के थार रेगिस्तान और पाकिस्तान के सूखे इलाकों से धूल उड़ा लाती हैं.
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वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दरअसल ठंडी और नम हवा का एक बड़ा सिस्टम है जो यूरोप और मध्य एशिया से आता है. अप्रैल 2026 में दो सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक साथ आए. इनकी वजह से 3 और 4 अप्रैल को दिल्ली-NCR में ज्यादा असर हुआ. हवाओं की रफ्तार 40-60 km/hr तक पहुंच गई. ये हवाएं पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से चलीं.
राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके से सूखी धूल उठी और दिल्ली तक पहुंच गई. गर्मी पहले से ज्यादा थी, जिससे जमीन गर्म हो चुकी थी. ऊपर की हवा में दबाव कम हो गया. जब ठंडी नम हवा नीचे आई तो वायुमंडल अस्थिर हो गया. नतीजा – तेज आंधी, धूल का गुबार और बाद में गरज-चमक के साथ बारिश. वैज्ञानिक कहते हैं कि गर्म हवा और ठंडी हवा का टकराव ही इस तरह की आंधी पैदा करता है.
#WATCH | Delhi: In a sudden weather shift today, a dust storm has hit the national capital.
(Visuals from the India Gate) pic.twitter.com/Pw9zOktJlC
धुंध क्यों बनी और नजर क्यों कम हुई
धूल भरी आंधी के बाद जो धुंध छाई, वो सिर्फ धूल के छोटे-छोटे कणों की वजह से बनी. तेज हवाएं जमीन से बारीक धूल उठाती हैं. उसे निचले वायुमंडल में फैला देती हैं. ये कण हवा में लंबे समय तक रहते हैं क्योंकि उनका वजन बहुत कम होता है. जब हवा की रफ्तार थोड़ी कम हुई तो ये कण नीचे नहीं गिरे बल्कि हवा में ही तैरते रहे. नतीजा – आसमान धुंधला हो गया और विजिबिलिटी कम हो गई.
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आईएमडी ने बताया कि यह धुंध प्रदूषण नहीं बल्कि प्राकृतिक धूल से बनी है. कभी-कभी इसमें थोड़ी नमी भी मिल जाती है जो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस लाता है, तो धुंध और गाढ़ी हो जाती है. यही वजह है कि सुबह-शाम सूरज दिखना मुश्किल हो गया और सांस लेने में भी दिक्कत हुई.
मौसम का अचानक बदलाव क्यों हुआ
मार्च-अप्रैल में दिल्ली-NCR में पहले गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया था. तापमान 35-37 डिग्री तक पहुंच गया था. अचानक वेस्टर्न डिस्टर्बेंस आया तो मौसम पूरी तरह पलट गया. गर्म हवा के ऊपर ठंडी हवा आने से वायुमंडल में बैलेंस बिगड़ गया. इससे बादल बने, हवाएं तेज हुईं और धूल उड़ी.
वैज्ञानिकों के मुताबिक यह प्री-मानसून यानी मानसून से पहले का आम मौसम है. लेकिन इस बार गर्मी ज्यादा होने की वजह से बदलाव ज्यादा तेज हुआ. हवाएं 30-35 किलोमीटर प्रति घंटा से शुरू होकर 50-60 तक पहुंच गईं. इससे पहले भी मार्च 2026 में कई बार ऐसा हुआ था. मौसम विशेषज्ञ कहते हैं कि गर्मी बढ़ने से जमीन पर लो प्रेशर यानी कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है, जो हवाओं को और तेज कर देता है.
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वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन भी इस तरह के मौसम में बदलाव को बढ़ा रहा है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से उत्तरी भारत में वसंत के मौसम में ही गर्मी जल्दी बढ़ रही है. इससे वायुमंडल अस्थिर हो जाता है. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस अब पहले की तरह नहीं बल्कि ज्यादा तेजी से आ रहे हैं.
थार रेगिस्तान सूख रहा है. वहां से धूल उठाना आसान हो गया है. नतीजा – धूल भरी आंधी की घटनाएं बढ़ रही हैं. आईएमडी और दूसरे मौसम एजेंसियां कह रही हैं कि भविष्य में ऐसे अचानक बदलाव और ज्यादा हो सकते हैं. IMD ने 4 अप्रैल को दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया था. तेज हवाएं, धूल, गरज-चमक और हल्की बारिश की संभावना बनी हुई है. इसके बाद मौसम थोड़ा स्थिर होगा लेकिन गर्मी फिर बढ़ेगी.
Source: AajTak
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