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इंसान लड़ते क्यों हैं

Posted By: Tarun Kumar Posted On: Apr 10, 2026Share Article
इंसान लड़ते क्यों हैं
ये तस्वीर 2019 की है जब चिम्पैंजियों के एक समूह ने दूसरे समूह के अकेले चिम्पैंजी को घेरकर हमला किया. इसी का विरोध करता अकेला चिम्पैंजी. (File Photo: Reuters)

इंसान लड़ते क्यों हैं? गृहयुद्धों का चिम्पैंजियों से कौन सा कनेक्शन जोड़ रहे साइंटिस्ट

युगांडा के नगोगो जंगल में 200 चिम्पैंजियों का विशाल समूह 20 साल तक शांतिपूर्वक रहता था. 2015 में यह दो गुटों में बंट गया. पुराने दोस्त अब दुश्मन बन गए. 2018 से शुरू हुए खूनी गृहयुद्ध में एक गुट ने दूसरे के 7 वयस्क नर और 17 बच्चों को मार डाला. कुल 24 मौतें हुईं. वैज्ञानिक कहते हैं- वे सभी अपनी सफलता के शिकार बने. भोजन की कोई कमी नहीं थी, फिर भी युद्ध छिड़ा. यह इंसानी गृहयुद्धों की जड़ बताता है.

युगांडा के घने जंगलों में एक बार 200 चिम्पैंजियों का विशाल परिवार 20 साल तक साथ रहता था. वे एक-दूसरे के साथ खेलते, साथ शिकार करते, साथ बच्चे पैदा करते और पड़ोसी समूहों पर हमला करके अपना इलाका बढ़ाते थे. सब कुछ शांतिपूर्ण था. लेकिन अचानक तीन साल में ही सब कुछ बदल गया.

पुराने दोस्त अब एक-दूसरे को मारने लगे. नरों को मारा, फिर बच्चों को भी नहीं बख्शा. अब तक 24 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. युद्ध अब भी जारी है. वैज्ञानिकों ने 30 साल की लगातार निगरानी के बाद इसकी पूरी कहानी Science जर्नल में बताई है. यह कहानी सिर्फ जंगली जानवरों की नहीं, बल्कि इंसानी गृहयुद्धों की जड़ों को भी समझाती है.

यह भी पढ़ें: रिलेशन बनाने के लिए 'बलिदान', जब मेटिंग के बाद नर को खा गई मादा, Video वायरल

नगोगो इलाके के ये चिम्पैंजी इतने सफल थे कि उनका समूह लगातार बढ़ता गया. भोजन की कोई कमी नहीं थी. जंगल में फल-फूल भरपूर थे. फिर भी 2015 में अचानक दो बड़े गुट बन गए – सेंट्रल और वेस्टर्न. पहले दोनों गुट एक-दूसरे से मिलते-जुलते थे, बच्चे पैदा करते थे. लेकिन जून 2015 को एक दिन सेंट्रल वाले चिम्पैंजी वेस्टर्न वालों को भगा दिए. उसके बाद दोनों गुट अलग-अलग रहने लगे.

वैज्ञानिक कहते हैं - वे अपनी सफलता के शिकार हो गए. समूह इतना बड़ा हो गया कि सब एक-दूसरे से जुड़े नहीं रह सके. 2014 में पांच बड़े मर्द चिम्पैंजी एक महीने में मर गए, जो समूह के बीच शांति बनाकर रखते थे. उनके जाने से रिश्ते टूटने लगे. ये चीज इंसानों में भी देखने को मिलता है.

दोस्त से दुश्मन: 2017 से शुरू हुआ खूनखराबा

2017 में तनाव चरम पर पहुंच गया. वेस्टर्न गुट के चिम्पैंजी सेंट्रल गुट के सबसे बड़े नर नेता (अल्फा मेल) पर हमला कर उसे घायल कर दिया. फिर 2018 से 2024 तक वेस्टर्न वाले लगातार हमले करते रहे. उन्होंने सेंट्रल गुट के 7 नर और 17 छोटे बच्चों को मार डाला. सेंट्रल गुट संख्या में ज्यादा था, लेकिन उसने कभी बदला नहीं लिया.

यह भी पढ़ें: दुनिया की मशहूर साइंटिस्ट और चिम्पैंजी एक्सपर्ट जेन गुडॉल का 91 वर्ष में निधन

वैज्ञानिक हैरान हैं - भोजन की कमी नहीं थी, फिर भी युद्ध क्यों? कारण था - पावर, इलाका और मादाओं पर कब्जा. वेस्टर्न वाले अपनी संख्या बढ़ाकर ज्यादा मादाओं तक पहुंचना चाहते थे. एक वैज्ञानिक ने कहा कि सेंट्रल वाले सोच रहे होंगे कि मादाएं छिन गईं, अब कुछ करना चाहिए. लेकिन उन्होंने गलत हिसाब लगाया और खुद ही मारे गए.

गोंबे का पुराना युद्ध: 50 साल पहले भी ऐसा ही हुआ था

यह पहली बार नहीं है. 1970 के दशक में तंजानिया के गोंबे जंगल में जेन गुडॉल ने भी यही देखा था. एक बड़ा समूह दो हिस्सों में बंट गया और चार साल तक जंग चली. एक गुट ने दूसरे गुट के 6 नर और एक मादा को मार डाला. उस समय वैज्ञानिकों ने चिम्पैंजी को केले खिलाए थे, इसलिए कुछ लोग कहते थे कि यह असली व्यवहार नहीं था. लेकिन नगोगो का अध्ययन बिना किसी खाने की मदद के हुआ. दोनों घटनाएं एक जैसी हैं - बड़े समूह का बंटवारा, पुराने दोस्तों का दुश्मन बनना और बिना किसी बड़े कारण के खूनखराबा.

इंसानी गृहयुद्धों की जड़ें चिंम्पैंजियों में क्यों?

यह कहानी सिर्फ चिंपैंजियों की नहीं, बल्कि इंसानों की भी है. चिम्पैंजी हमारे डीएनए का 98% हिस्सा साझा करते हैं. वे धर्म, भाषा, राजनीति या जाति के नाम पर नहीं लड़ते. फिर भी वे गृहयुद्ध कर लेते हैं. वैज्ञानिक रिचर्ड रंगहम कहते हैं कि आपको युद्ध के लिए विचारधारा की जरूरत नहीं है. यह हमारी जैविक प्रकृति में है.

यह भी पढ़ें: मोसाद के ऑपरेशन 'नेगेव डेजर्ट' की कहानी जिसमें PAK के सीक्रेट ठिकाने पर कब्जे का किया गया था रिहर्सल

इंसानों में भाषा होने से बदला लेने की योजना बनाई जा सकती है, इसलिए हमारे युद्ध और लंबे और खूनी होते हैं. लेकिन जड़ एक ही है - समूह का बंटवारा, पावर की लड़ाई और ‘हम’ बनाम ‘वे’ का भाव. आज दुनिया में जहां-तहां गृहयुद्ध हो रहे हैं, वहां चिंपैंजियों की कहानी हमें याद दिलाती है कि हम भी सफलता के शिकार हो सकते हैं.

बोनोबो का सबक: हम लड़ नहीं, बल्कि साथ रह सकते हैं

चिम्पैंजी के अलावा हमारे एक और करीबी रिश्तेदार हैं - बोनोबो. वे भी समूह में रहते हैं, लेकिन कभी इतने खूनी गृहयुद्ध नहीं करते. वे सहयोग करते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं. वैज्ञानिक कहते हैं कि हमारा विकास हमें युद्ध के लिए मजबूर नहीं करता. हम इंसान अजनबियों की भी मदद करते हैं.

नगोगो का अध्ययन हमें सिखाता है कि अगर हम सावधान रहे, तो अपने अंदर के चिम्पैंजी को काबू में रख सकते हैं. यह युद्ध अभी भी चल रहा है. 2025 और 2026 में भी नए हमले हुए हैं. 30 साल की मेहनत से वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया - चिम्पैंजी भी अपनी सफलता के शिकार हो सकते हैं. और शायद इंसान भी. जंगल की यह कहानी शहरों के गृहयुद्धों को समझने का नया आईना बन गई है.

Source: AajTak
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मसूरी-कैंपटी रूट पर भारी बारिश का कहर

टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-707A पर भारी बारिश के कारण डिमटा बैंड के पास सड़क वॉशआउट हो गई है. मसूरी-कैंपटी-यमुना ब्रिज मार्ग का बड़ा हिस्सा

5 days ago

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे
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बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
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दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
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कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
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चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
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पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से
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21वीं सदी के अंत बढ़ेगा पारा

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक और स्थानीय जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इसका गंभीर असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है.

6 days ago

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों
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चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट क्रैश

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था. नासा ने चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को लीं.

6 days ago

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ
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144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ दिनों तक सावधानी बरतने की जरूरत है. मध्य भारत में बारिश अभी कुछ दिन और जारी रह सकती है. अगले 144 घंटे यानी करीब 6 दिनों के मौसम अनुमान के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश,

6 days ago