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ढाई डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा दुनिया का तापमान, जानिए क्या चेतावनी है UNEP की रिपोर्ट में

Posted By: Tarun Kumar Posted On: Nov 06, 2025Share Article
ढाई डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा दुनिया का तापमान
दो साल पहले एथेंस के जंगलों

ढाई डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाएगा दुनिया का तापमान, जानिए क्या चेतावनी है UNEP की रिपोर्ट में

दुनिया के सारे देश कितना भी प्रयास कर लें लेकिन 2100 तक तापमान 2.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ने वाला है. ये खुलासा यूएनईपी रिपोर्ट 2025 में हुआ है. यानी मौसमों में बदलाव होगा. भयानक आपदाएं आएंगी. जी20 देश इस मामले में ढंग से काम नहीं कर रहे. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अमीर देशों की कार्रवाई अपर्याप्त है.

अगर सभी देश अपनी जलवायु सुधारने की प्रतिज्ञाओं को पूरी तरह लागू करें, तो भी इस सदी में वैश्विक तापमान 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. यह आंकड़ा पिछले साल की भविष्यवाणी 2.6-2.8 डिग्री से थोड़ा कम है. लेकिन वर्तमान नीतियां अब भी धरती को 2.8 डिग्री के रास्ते पर ले जा रही हैं, जो पिछले साल के 3.1 डिग्री से कम है. यह बात संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 'एमिशन गैप रिपोर्ट 2025' में कही गई है.

रिपोर्ट कहती है कि दुनिया अभी भी पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री के लक्ष्य से बहुत दूर है. अगले दशक में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री से ऊपर चला जाएगा, जब तक देश जल्दी कदम न उठाएं.

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यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि देशों को पेरिस समझौते के तहत तीन मौके मिले हैं वादे निभाने के लिए, लेकिन हर बार वे लक्ष्य से चूक गए. राष्ट्रीय योजनाओं से कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यह काफी तेज नहीं है. इसलिए हमें बिना रुके उत्सर्जन कम करने की जरूरत है, खासकर मुश्किल भू-राजनीतिक स्थिति में.

यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से ठीक पहले आई है, जहां विश्व नेता इकट्ठा होंगे. आइए रिपोर्ट की मुख्य बातें समझते हैं.

पेरिस समझौता 2015 का है, जिसमें दुनिया ने तय किया कि तापमान बढ़त को 1.5 डिग्री तक सीमित रखना है. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि अगर देश अपनी वर्तमान प्रतिज्ञाओं (एनडीसी) पूरी करें, तो तापमान 2.3-2.5 डिग्री बढ़ेगा. यह थोड़ा बेहतर है, लेकिन अभी भी खतरनाक. वर्तमान नीतियां 2.8 डिग्री का रास्ता दिखा रही हैं.

रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगले 10 सालों में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री पार कर जाएगा. इसे रोकने के लिए बढ़त को सिर्फ 0.3 डिग्री तक सीमित रखना होगा. 2100 तक तापमान को नीचे लाना होगा. अगर ऐसा न हुआ, तो बाढ़, सूखा और चरम मौसम जैसी आपदाएं बढ़ेंगी.

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पेरिस समझौते के 195 देशों में से सिर्फ एक तिहाई (यानी 65 देश) ने इस साल नई या अपडेटेड राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएं (एनडीसी) जमा कीं. ये देश वैश्विक उत्सर्जन का 63 प्रतिशत कवर करते हैं. बाकी देशों ने पुरानी योजनाओं को ही जारी रखा.

जी20 देश, जो वैश्विक उत्सर्जन का 77 प्रतिशत हिस्सा हैं. ये भी 2030 के अपने लक्ष्यों को पूरा करने के रास्ते पर नहीं हैं. 2035 तक और गहरी कटौती की जरूरत है, लेकिन वे भी पीछे हैं. रिपोर्ट कहती है कि अमीर देशों ने गरीब देशों को मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो रहा.

2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 57.7 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (जीटीसीओ2ई) पहुंच गया. यह पिछले साल से 2.3 प्रतिशत ज्यादा है. इस बढ़ोतरी का आधा से ज्यादा हिस्सा जंगलों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव से आया. जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) से उत्सर्जन भी बढ़ता रहा.

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शीर्ष उत्सर्जक देशों में भारत और चीन ने सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की. यूरोपीय संघ अकेला बड़ा अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र था, जहां उत्सर्जन कम हुआ. रिपोर्ट कहती है कि अगर 2019 के स्तर से तुलना करें, तो 2030 तक उत्सर्जन 26 प्रतिशत कम और 2035 तक 46 प्रतिशत कम होना चाहिए. तभी 1.5 डिग्री का लक्ष्य संभव है.

जलवायु विशेषज्ञों ने रिपोर्ट को चेतावनी का संकेत बताया है. यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स की रेचल क्लीटस ने कहा कि ये आंकड़े चिंताजनक, गुस्सा दिलाने वाले और दिल तोड़ने वाले हैं. अमीर देशों की कमजोर कार्रवाई और जीवाश्म ईंधन हितों की बाधा इसके लिए जिम्मेदार हैं.

एम्बर के रिचर्ड ब्लैक ने कहा कि राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं साफ ऊर्जा संक्रमण की सकारात्मक तस्वीर दिखाती हैं. इंटरनेशनल क्लाइमेट पॉलिसी हब की कैथरीन अब्रेऊ ने जोर दिया कि पेरिस समझौता विफल नहीं हो रहा, बल्कि कुछ शक्तिशाली जी20 देश वादे निभाने में असफल हो रहे हैं.

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रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बिना तेज और बड़े उत्सर्जन कटौती के, दुनिया आपदा वाली गर्मी में फंस जाएगी. यह गरीब और कमजोर देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी. नवीकरणीय ऊर्जा, जंगलों की रक्षा और जीवाश्म ईंधन छोड़ना जरूरी है.

यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि समय तेजी से निकल रहा है. अगर हम अब नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी. जलवायु परिवर्तन सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन अमीर देशों को नेतृत्व करना होगा.

Source: AajTak
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मसूरी-कैंपटी रूट पर भारी बारिश का कहर

टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-707A पर भारी बारिश के कारण डिमटा बैंड के पास सड़क वॉशआउट हो गई है. मसूरी-कैंपटी-यमुना ब्रिज मार्ग का बड़ा हिस्सा

5 days ago

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे
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बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
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दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
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कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
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चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
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पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से
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21वीं सदी के अंत बढ़ेगा पारा

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक और स्थानीय जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इसका गंभीर असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है.

6 days ago

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों
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चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट क्रैश

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था. नासा ने चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को लीं.

6 days ago

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ
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144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ दिनों तक सावधानी बरतने की जरूरत है. मध्य भारत में बारिश अभी कुछ दिन और जारी रह सकती है. अगले 144 घंटे यानी करीब 6 दिनों के मौसम अनुमान के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश,

6 days ago