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डार्क एनर्जी बढ़ी तो क्या होगा, क्या वाकई धरती पर मंडरा रहा है खतरा?

Posted By: Hari Ram Posted On: Jan 02, 2026Share Article
डार्क एनर्जी बढ़ी तो क्या होगा
डार्क एनर्जी के बारे में बारे में वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह नहीं जानते. (Photo- Pixabay)

70 फीसदी यूनिवर्स एक रहस्यमयी ताकत के कब्जे में, कितना सुरक्षित है हमारा ग्रह डार्क एनर्जी से?

जब हम डार्क एनर्जी की बात करते हैं, तो दिमाग में किसी पैरानॉर्मल ताकत की छवि बनती है. हालांकि विज्ञान में यह बिल्कुल अलग चीज है. एस्ट्रोफिजिक्स के मुताबिक, डार्क एनर्जी ऐसी अनजानी ताकत है जो ब्रह्मांड को तेजी से फैलने पर मजबूर कर रही है. लेकिन यही शक्ति एक दिन धरती के खत्म होने की वजह भी बन सकती है.

पहले वैज्ञानिक यूनिवर्स को एक शांत और न बदलने वाली जगह मानते थे, जहां धरती पर जीवन चलता रहेगा. फिर बिग बैंग की सोच आई, आकाशगंगाओं की खोज हुई, ब्लैक होल का पता लगा और आखिर में एक ऐसी खोज सामने आई जिसने वैज्ञानिकों को चौंका दिया. ब्रह्मांड तेजी से फैल रहा है, और इसके पीछे है डार्क एनर्जी. यही वो चीज है, जो यूनिवर्स के फैलाव को बढ़ा रही है. लेकिन इसका उल्टा असर धरती पर पड़ सकता है.

क्या है डार्क एनर्जी और कैसे करती है काम

डार्क एनर्जी एक ऐसी रहस्यमयी ताकत है, जिसके बारे में वैज्ञानिक आज भी पूरी तरह नहीं जानते. इसे हम देख नहीं सकते और न ही सीधे माप सकते हैं, लेकिन इसके असर साफ दिखाई देते हैं. यही ताकत ब्रह्मांड को लगातार और पहले से ज्यादा तेजी से फैलने पर मजबूर कर रही है. पहले माना जाता था कि गुरुत्वाकर्षण इस फैलाव को धीरे-धीरे कम कर देगा, लेकिन पता लगा कि ब्रह्मांड तो और तेजी से फैल रहा है. इसी अनजानी वजह को डार्क एनर्जी नाम दिया गया. आज की समझ के मुताबिक करीब 70 फीसदी यूनिवर्स डार्क एनर्जी से बना है.

इसका असर बहुत बड़े पैमाने पर होता है, जैसे आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ाना. इसका असर धरती, सूरज या सोलर सिस्टम पर नहीं पड़ता था क्योंकि यहां गुरुत्वाकर्षण मजबूत रहा. लेकिन नासा के मुताबिक, यूनिवर्स के बनने के करीब नौ अरब साल बाद यह ताकत गुरुत्वाकर्षण पर भारी पड़ने लगी. इससे अंतरिक्ष का फैलाव धीमा होने की बजाय और तेज होता चला गया.

वैज्ञानिकों ने इस एनर्जी की खोज कैसे की

डार्क एनर्जी दिखाई नहीं देती. यह न रोशनी छोड़ती है, न उसे रिफ्लेक्ट करती है. फिर भी यह पूरे ब्रह्मांड का लगभग 70 फीसदी हिस्सा है, यानी सारे तारे, ग्रह, आकाशगंगाएं और यहां तक कि डार्क मैटर को मिलाकर भी इससे कुछ कम ही होता है. वैज्ञानिकों ने इसे खोजने के लिए नहीं खोजा, बल्कि यह अचानक समझ आया, जब लगा कि कुछ अलग है. यूनिवर्स वैसा बर्ताव नहीं कर रहा था जैसी कैलकुलेशन बता रही थीं.

1922 में एक रूसी गणितज्ञ अलेक्जेंडर फ्रीडमैन ने यूनिवर्स के भविष्य की अलग-अलग संभावनाएं निकालीं. उनकी कैलकुलेशन ने उस समय एक चौंकाने वाली बात कही. यूनिवर्स स्थिर नहीं है, बल्कि यह फैल सकता है. चूंकि इसकी तह तक नहीं पहुंचा जा सका, लिहाजा इसे डार्क एनर्जी यानी कोई रहस्यमयी ताकत नाम दे दिया गया.

क्यों हो सकती है चिंता की बात

ग्रेविटी का काम चीजों को जोड़ना है. इसी से तारे, ग्रह और आकाशगंगाएं बनती हैं. लेकिन डार्क एनर्जी इसका उलटा काम करती है. यह बाहर की ओर धक्का देती है, जिससे बहुत बड़े स्तर पर यूनिवर्स फैल रहा है. कई साल तक एक्सपर्ट मानते रहे कि डार्क एनर्जी स्थिर है, यानी न बदलने वाली चीज है लेकिन अगर ऐसा होता, तो यूनिवर्स हमेशा फैलता रहता और धीरे धीरे ठंडा और खाली होता जाता. इस कंसेप्ट को बिग फ्रीज कहते हैं. फिलहाल तो ऐसा हुआ नहीं.

हाल की कुछ स्टडीज चिंता बढ़ाने वाली बात कहती हैं. डार्क एनर्जी वक्त के साथ शायद कमजोर हो रही है. अगर ऐसा हुआ, तो गुरुत्वाकर्षण धीरे धीरे फिर हावी हो सकता है. फैलाव धीमा पड़ सकता है, फिर रुक सकता है और आखिर में यूनिवर्स सिकुड़ने लगे. इस हालात को बिग क्रंच कहा जाता है.

बिग क्रंच की स्थिति में आकाशगंगाएं एक दूसरे के और करीब आने लगेंगी, तापमान बढ़ेगा और खुद स्पेस सिकुड़ने लगेगा. इसका मतलब यह हो सकता है कि ब्रह्मांड आखिर में बेहद घना और गर्म होते हुए खत्म हो जाए. बिग क्रंच और बिग फ्रीज दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं. लेकिन वैज्ञानिकों की चिंता की वजह ये है कि अब यह संभावना बढ़ती दिख रही है कि डार्क एनर्जी वैसा बर्ताव नहीं कर रही जैसा पहले लगा था. ऐसे में ग्रेविटी काफी तेजी से हावी हो सकती है और धरती समय से पहले खत्म हो सकती है.

इसी वजह से नए तरीके तैयार किए जा रहे हैं, ताकि यूनिवर्स के फैलाव को सही ढंग से समझा जा सके. मकसद सीधा लेकिन गहरा है. यह जानना कि डार्क एनर्जी स्थिर है या धीरे धीरे कमजोर हो रही है. इसी से समझ आ सकेगा कि यूनिवर्स का अंत कैसे हो सकता है, या फिर होगा भी या नहीं, या फिर डार्क एनर्जी की मौजूदगी की वजह क्या है?

Source: AajTak
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बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
विज्ञान
दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
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कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
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चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
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पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago