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दिल्ली-NCR में अगले दो घंटे मौसम का मिजाज बिगड़ा रहेगा. बारिश शुरू हो चुकी है. बादलों की वजह से अंधेरा भी है. नोएडा, गाजियाबाद, दिल्ली और गुरुग्राम के कुछ हिस्सों में तेज बारिश के साथ बिजली चमकने और 25 किमी प्रति घंटे तक की हवाएं चलने का अनुमान है. दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश हो रही है. खराब मौसम की वजह से दिल्ली एयरपोर्ट से 15 उड़ानों को जयपुर डायवर्ट करना

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दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोई नया H1N1 स्ट्रेन आया है? एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौसमी बदलाव के कारण वायरस सक्रिय हो रहा है. राजधानी दिल्ली समेत अब देश क कई दूसरे इलाकों में भी स्वाइन फ्लू के केस बढ़ने लगे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इस वायरस का कोई नया स्ट्रेन आ गया है जो तेजी

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Swine Flu vaccination : दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं, कई मरीजों में तेज बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि क्या स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए कोई वैक्सीन है. अगर है तो ये कब लगती है और कौन- कौन इसको लगवा सकता है.Swine Flu vaccination : दिल्ली समेत कई राज्यों में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं,

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डराने वाला खुलासा- कैसे प्लास्टिक के नन्हे कण धरती को बना रहे हैं गर्म

Posted By: Jaydatt Chaudhary Posted On: May 07, 2026Share Article
डराने वाला खुलासा- कैसे प्लास्टिक के नन्हे कण धरती को बना रहे हैं गर्म
माइक्रोप्लास्टिक की वजह से धरती गर्म हो रही है. ये साइंटिफिक खुलासा हाल ही में हुआ है. (Photo: Getty)

डराने वाला खुलासा- कैसे प्लास्टिक के नन्हे कण धरती को बना रहे हैं और गर्म

माइक्रोप्लास्टिक्स वायुमंडल में गर्मी सोखकर ग्लोबल वार्मिंग बढ़ा रहे हैं. रंगीन और काले प्लास्टिक के कण सफेद कणों की तुलना में 75 गुना अधिक गर्मी सोखते हैं, जो भविष्य में क्लाइमेट चेंज के लिए एक गंभीर खतरा हैं.

हाल ही में हुए एक नए रिसर्च ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. अब तक हम जानते थे कि प्लास्टिक प्रदूषण हमारे समुद्रों, नदियों और मिट्टी को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक के सूक्ष्म कण जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स कहा जाता है, हमारे वायुमंडल को गर्म करने में भी बड़ी भूमिका निभा रहे हैं.

नेचर क्लाइमेट चेंज जर्नल में छपा रिसर्च यह बताता है कि हवा में तैरते ये नन्हे कण सूरज की रोशनी को सोख रहे हैं, जिससे पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है. खास तौर से रंगीन माइक्रोप्लास्टिक्स सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहे हैं.

क्या होते हैं माइक्रोप्लास्टिक्स और वायुमंडल में इनकी भूमिका?

माइक्रोप्लास्टिक्स प्लास्टिक के वे छोटे टुकड़े होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर से भी कम होता है. ये अक्सर बड़े प्लास्टिक कचरे के टूटने या घिसने से बनते हैं. हमारे कपड़ों, कॉस्मेटिक्स और टायरों के घिसने से निकलने वाले ये कण आज हवा में हर जगह मौजूद हैं.

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ड्यूक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ड्रू शिंडेल के अनुसार, वायुमंडल में मौजूद ये कण दो तरह से काम करते हैं- या तो ये सूरज की रोशनी को वापस अंतरिक्ष में रिफलेक्ट कर देते हैं, जिससे ठंडक होती है. या फिर ये गर्मी को सोख लेते हैं, जिससे तापमान बढ़ता है. यह साफ हो गया है कि कुल मिलाकर माइक्रोप्लास्टिक्स गर्मी को सोखने का काम ज्यादा कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि वे वार्मिंग एजेंट यानी धरती को गर्म करने वाले कारण बन चुके हैं.

रंगीन और काले प्लास्टिक: गर्मी सोखने वाले सबसे बड़े दुश्मन

चीन की फुदान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पाया कि प्लास्टिक का रंग यह तय करने में बहुत महत्वपूर्ण है कि वह कितनी गर्मी पैदा करेगा. काले, पीले, नीले और लाल रंग के माइक्रोप्लास्टिक्स सफेद या पारदर्शी कणों की तुलना में सूरज की रोशनी को बहुत तेजी से सोखते हैं.

स्टडी में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि रंगीन और काले प्लास्टिक के कण बिना रंग वाले प्लास्टिक की तुलना में 75 गुना ज्यादा गर्मी सोखते हैं. जैसे-जैसे ये कण पुराने होते हैं, वायुमंडल में मौजूद अन्य रसायनों के संपर्क में आते हैं, उनकी गर्मी सोखने की क्षमता और भी बदल जाती है, जो जलवायु के लिए एक अनजाना खतरा है.

कोयले के पावर प्लांट्स और प्रदूषण से तुलना

वैज्ञानिकों ने माइक्रोप्लास्टिक्स के प्रभाव की तुलना ब्लैक कार्बन या कालिख (Soot) से की है, जो जीवाश्म ईंधन के जलने से पैदा होती है. वायुमंडल में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक्स, ब्लैक कार्बन द्वारा होने वाली गर्मी का लगभग छठा हिस्सा पैदा कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें: दुनिया के सबसे बड़े मौसम वैज्ञानिक की भविष्यवाणी- 2026 होगा सबसे गर्म

प्रोफेसर शिंडेल का कहना है कि एक साल में निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक्स का वैश्विक प्रभाव लगभग 200 कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के बराबर है. हालांकि यह कारों या बड़ी इंडस्ट्रीज के मुकाबले कम लग सकता है, लेकिन यह इतना भी कम नहीं है कि इसे नजरअंदाज कर दिया जाए. सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्लास्टिक दशकों तक नष्ट नहीं होता, जिसका मतलब है कि इसके दीर्घकालिक परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं.

भविष्य की चुनौतियां

फिलहाल जलवायु परिवर्तन के जो मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, उनमें माइक्रोप्लास्टिक्स से होने वाली इस अतिरिक्त गर्मी को शामिल नहीं किया गया है. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह शोध केवल एक शुरुआत है और अभी बहुत कुछ जानना बाकी है.

विएना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एंड्रियास स्टोहल के अनुसार, वायुमंडल में माइक्रोप्लास्टिक्स को मापने की तकनीक अभी शुरुआती दौर में है. इसलिए अभी इसके सटीक प्रभाव को लेकर अनिश्चितताएं बनी हुई हैं. वे यह भी कहते हैं कि ईकोसिस्टम और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को देखते हुए प्लास्टिक उत्पादन पर लगाम लगाना पहले से ही जरूरी था. अब जलवायु परिवर्तन एक और बड़ा कारण बन गया है.

यह भी पढ़ें: हंतावायरस का नया चेहरा दिखा, क्रूज शिप पर इंसानों से इंसानों में फैलने की खबर

प्रोफेसर शिंडेल उम्मीद करते हैं कि इस शोध के बाद दुनिया भर के वैज्ञानिक इस दिशा में और अधिक काम करेंगे ताकि हम समझ सकें कि ये अदृश्य कण हमारी धरती के भविष्य को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं. फिलहाल संदेश साफ है- प्लास्टिक सिर्फ जमीन और पानी की समस्या नहीं, बल्कि हमारे आसमान और जलवायु के लिए भी एक बड़ा खतरा बन चुका है.

Source: AajTak
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बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
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दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
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कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
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चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

5 days ago

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
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पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से
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21वीं सदी के अंत बढ़ेगा पारा

जलवायु परिवर्तन के चलते 21वीं सदी के अंत तक उत्तराखंड की कोसी नदी बेसिन के तापमान में बढ़ोतरी की चेतावनी दी गई है. यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि पहाड़ी समुदाय मुख्य रूप से प्राकृतिक और स्थानीय जल स्रोतों पर ही निर्भर हैं. दुनिया भर के वैज्ञानिक क्लाइमेट चेंज को लेकर लगातार चिंता जता रहे हैं. इसका गंभीर असर पूरे विश्व में दिखाई देने लगा है.

6 days ago

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों
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चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट क्रैश

चांद पर हुई स्पेसएक्स रॉकेट की टक्कर का निशान अब साफ दिखाई दे रहा है. नासा की नई तस्वीरों में क्रैश से बना करीब 60 फीट चौड़ा गड्ढा दिखा है. खास बात ये है कि इसकी तस्वीर लेना भी वैज्ञानिकों के लिए आसान नहीं था. नासा ने चांद पर स्पेसएक्स के रॉकेट के टकराने से बने गड्ढे की नई तस्वीरें जारी की हैं. ये तस्वीरें नासा के Lunar Reconnaissance Orbiter (LRO) ने 11 और 12 अगस्त को लीं.

6 days ago

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ
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144 घंटे तक नहीं थमेगी बारिश

बारिश का दौर अभी थमता नहीं दिख रहा. अगले 144 घंटे पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण-पूर्वी यूपी में भारी बारिश हो सकती है. मौसम के इस अनुमान के बीच इन इलाकों में लोगों को अगले कुछ दिनों तक सावधानी बरतने की जरूरत है. मध्य भारत में बारिश अभी कुछ दिन और जारी रह सकती है. अगले 144 घंटे यानी करीब 6 दिनों के मौसम अनुमान के मुताबिक पूर्वी मध्य प्रदेश,

6 days ago