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चांद का सफर...10 दिन बाद धरती पर लौटे चंद्रयात्री

Artemis 2 Splashdown: चांद का सफर.. 10 दिन बाद धरती पर लौटे चंद्रयात्री, प्रशांत महासागर में उतरा NASA का यान
नासा का आर्टेमिस II मिशन सफलतापूर्वक पूरा हो गया है. चारों अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों की चंद्रमा यात्रा के बाद प्रशांत महासागर में सुरक्षित उतरे. यह आधा सदी बाद इंसानों की पहली चंद्रमा यात्रा थी. मिशन में उन्होंने पृथ्वी से सबसे दूर रिकॉर्ड दूरी तय की. अब 2028 में चंद्रमा पर लैंडिंग की तैयारी है.
नासा के आर्टेमिस II मिशन के चार अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर सुरक्षित वापस आ गए हैं. उनका कैप्सूल यानी इंटीग्रिटी ने प्रशांत महासागर में दक्षिणी कैलिफोर्निया तट के पास समंदर में उतरा. यह मिशन 10 दिनों तक चला. इंसानों ने पिछले 50 सालों में पहली बार चंद्रमा के पास की यात्रा की है. इस यात्रा में उन्होंने कुल 11.16 लाख किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय की. यह मिशन नासा के बड़े प्लान का हिस्सा है, जिसमें भविष्य में चंद्रमा पर इंसानों को उतारना और फिर मंगल ग्रह की ओर बढ़ना शामिल है.
आर्टेमिस II मिशन क्यों महत्वपूर्ण था?
आर्टेमिस II नासा का पहला क्रूड टेस्ट फ्लाइट था, जिसमें चार अंतरिक्ष यात्री शामिल थे. वे 1 अप्रैल को फ्लोरिडा के केप कैनवरल से एसएलएस रॉकेट से लॉन्च हुए थे. मिशन में उन्होंने पृथ्वी की दो कक्षाओं में घूमने के बाद चंद्रमा के बहुत करीब पहुंचकर उसकी परिक्रमा की. चंद्रमा के दूर वाले हिस्से यानी फार साइड के पास से गुजरते हुए वे पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी पर पहुंचे. उनकी सबसे ज्यादा दूरी 406771 किलोमीटर थी, जो अपोलो 13 के पुराने रिकॉर्ड से ज्यादा थी.
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इस मिशन ने आर्टेमिस प्रोग्राम को मजबूत किया. आर्टेमिस का लक्ष्य है कि 2028 तक चंद्रमा पर इंसान उतारें. वहां लंबे समय तक रहने की व्यवस्था बनाएं. यह चंद्रमा को मंगल ग्रह की यात्रा के लिए स्टेपिंग स्टोन बनाएगा. पिछले अपोलो मिशन के बाद 1972 में आखिरी बार इंसान चंद्रमा पर उतरे थे.
Welcome home Reid, Victor, Christina, and Jeremy! 🫶
The Artemis II astronauts have splashed down at 8:07pm ET (0007 UTC April 11), bringing their historic 10-day mission around the Moon to an end. pic.twitter.com/1yjAgHEOYl
अब आर्टेमिस II ने आधा सदी बाद इंसानों को चंद्रमा के आसपास ले जाकर इतिहास रचा है. इस मिशन में पहली बार एक महिला, एक ब्लैक एस्ट्रोनॉट और एक गैर-अमेरिकी नागरिक में शामिल हुए.
स्प्लैशडाउन के दौरान क्या हुआ?
ओरियन कैप्सूल पृथ्वी के वायुमंडल में घुसने के दौरान बहुत तेज गति से आ रहा था. री-एंट्री के समय यह लगभग 39 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रहा था. वायुमंडल की रगड़ से कैप्सूल के बाहर का तापमान 2760 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. इससे एक लाल-गर्म प्लाज्मा की परत बन गई, जो रेडियो संपर्क को 6 मिनटों के लिए काट देती है. यह 13 मिनट का सफर बहुत तनाव भरा था.
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नासा के इंजीनियरों ने 2022 के अनक्रूड आर्टेमिस I टेस्ट से सीखते हुए इस बार ट्रैजेक्टरी थोड़ी बदल दी थी, ताकि गर्मी कम बने और हीट शील्ड सुरक्षित रहे. कैप्सूल ने इस टेस्ट को सफलतापूर्वक पास कर लिया है.
जब प्लाज्मा की परत हटी, तो दो सेट पैराशूट खुले. इससे कैप्सूल की गति 24 किलोमीटर प्रति घंटे तक कम हो गई. आखिर में यह प्रशांत महासागर में धीरे से गिर गई. नासा की वेबकास्ट पर लाइव तस्वीरें दिख रही थीं, जहां पैराशूट खुले और कैप्सूल पानी पर तैरती दिखी.
स्प्लैशडाउन के बाद नासा और अमेरिकी नौसेना की टीमों ने कैप्सूल को सुरक्षित किया. लगभग एक घंटे में अंतरिक्ष यात्रियों को कैप्सूल से बाहर निकाला गया. हेलीकॉप्टर से पास की रिकवरी शिप पर ले जाया गया. वहां उनका पहला मेडिकल चेकअप हुआ. यह पूरा ऑपरेशन बहुत सावधानी से किया गया क्योंकि कैप्सूल पानी में तैर रहा था.
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कौन थे ये चार अंतरिक्ष यात्री?
इस ऐतिहासिक मिशन में चार सदस्य थे...
ये सभी अनुभवी एस्ट्रोनॉट हैं. उन्होंने मिशन के दौरान चंद्रमा के दूर वाले हिस्से को देखा. पृथ्वी की खूबसूरत तस्वीरें लीं और कई महत्वपूर्ण टेस्ट किए. मिशन में विज्ञान और तकनीक की कई उपलब्धियां सामने आईं, जो भविष्य के मिशनों के लिए मददगार होंगी.
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आर्टेमिस प्रोग्राम का बड़ा लक्ष्य
आर्टेमिस II सिर्फ एक टेस्ट फ्लाइट नहीं था. यह आर्टेमिस सीरीज का दूसरा मिशन है. पहले अनक्रूड आर्टेमिस I ने 2022 में चंद्रमा की यात्रा की थी. अब सफल स्प्लैशडाउन के बाद नासा आर्टेमिस III की तैयारी कर रहा है, जिसमें चंद्रमा पर लैंडिंग होनी है. लंबे समय का लक्ष्य है चंद्रमा पर बेस बनाना, जहां वैज्ञानिक प्रयोग हों और संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए. यह सब मंगल ग्रह पर इंसान भेजने की तैयारी है.
इस मिशन ने एसएलएस रॉकेट और ओरियन स्पेसक्राफ्ट की विश्वसनीयता साबित की. बोइंग और नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन जैसी कंपनियों को भी इस सफलता से फायदा हुआ. कोल्ड वॉर के समय अपोलो मिशन सोवियत संघ से आगे निकलने के लिए था, लेकिन अब आर्टेमिस चीन से आगे रहने के लिए है.
क्यों है यह मिशन खास?
यह मिशन सिर्फ यात्रा नहीं था. इसमें इंसानी इतिहास, विविधता और भविष्य की खोज शामिल थी. पहली बार इतने बैकग्राउंड वाले लोग साथ गए. सफल स्प्लैशडाउन ने साबित किया कि ओरियन कैप्सूल की हीट शील्ड काम कर रही है. री-एंट्री से जुड़ी चुनौतियां हल हो रही हैं. यह उपलब्धि दिखाती है कि विज्ञान और इंजीनियरिंग कितनी शक्तिशाली हो सकती है.
आर्टेमिस II के सफल समापन के साथ इंसान फिर से चंद्रमा की ओर बढ़ रहा है. यह सिर्फ शुरुआत है. आने वाले सालों में चंद्रमा पर बस्तियां बसेंगी और मंगल की यात्रा करीब आएगी. यह मिशन युवाओं को प्रेरित करेगा कि वे विज्ञान, इंजीनियरिंग और स्पेस एक्सप्लोरेशन की ओर रुख करें. पृथ्वी से इतनी दूर जाकर वापस सुरक्षित लौटना इंसानी दिमाग और तकनीक की जीत है.
Source: AajTak
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