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5 साल में 27 हजार से ज्यादा अवैध खनन के मामले... अरावली का सच

Posted By: Vishal Maurya Posted On: Dec 25, 2025Share Article
5 साल में 27 हजार से ज्यादा अवैध खनन के मामले
जयपुर में अरावली पहाड़ियों में जयगढ़ किले की डिफेंसिव वॉल और वाटर स्टोरेज के लिए

5 साल में 27 हजार से ज्यादा अवैध खनन के मामले... अरावली का सच

राजस्थान के अरावली क्षेत्र में 2020 से 2025 तक अवैध खनन के 27,693 मामले सामने आए, लेकिन सिर्फ 11% पर FIR दर्ज हुई. सबसे ज्यादा मामले भीलवाड़ा (4838) और जयपुर (4261) में. ये बिना किसी सपोर्ट के नहीं हो सकता. सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में '100 मीटर फॉर्मूला' लागू किया, लेकिन पर्यावरणविद इसे अरावली के लिए खतरा बता रहे हैं.

पिछले पांच साल में अरावली की छाती इतनी खोदी गई है कि लगभग पूरे राजस्थान में ये पहाड़ियां छिछली हो चुकी हैं. मजेदार बात ये है कि राजस्थान के अरावली क्षेत्र में 2020 से अब तक अवैध खनन, परिवहन और सामग्री जमा करने के कुल 27693 मामले सामने आए हैं. लेकिन इनमें से सिर्फ 3199 मामलों में ही FIR दर्ज की गई, यानी केवल 11 प्रतिशत. ये जानकारी केंद्र सरकार ने लोकसभा में 21 जुलाई 2025 को दी. ये कैसे हो सकता है कि इतने मामले बिना किसी सपोर्ट के छिपाए जा सकें.

लोकसभा में पेश रिपोर्ट ... PDF देखें

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अरावली पहाड़ियां दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों से गुजरती हैं. यह क्षेत्र पर्यावरण की दृष्टि से बहुत संवेदनशील है. यहां बिना राज्य सरकार की अनुमति के कोई खनन या उत्खनन की गतिविधि नहीं की जा सकती.

राजस्थान में अरावली बेल्ट के 20 जिले हैं, जैसे अजमेर, जयपुर, अलवर आदि. मंत्रालय ने इन सभी जिलों में अवैध खनन से जुड़े मामलों, FIR, जब्त वाहनों और वसूले जुर्माने की जानकारी दी. सबसे ज्यादा मामले भीलवाड़ा जिले में दर्ज हुए हैं. यहां 2020 से 2025 तक कुल 4838 मामले सामने आए. दूसरे नंबर पर राजधानी जयपुर है, जहां 4261 मामले दर्ज हुए. लेकिन सिर्फ अवैध खनन के मामले देखें तो भीलवाड़ा में 514 और जयपुर में सिर्फ 184 थे.

FIR की संख्या में बड़ा फर्क है. भीलवाड़ा में पांच साल में 1102 FIR दर्ज हुईं, जबकि जयपुर में सिर्फ 68. 2023-24 में जयपुर में कुल 747 अवैध खनन संबंधी मामले थे, लेकिन सिर्फ 23 FIR ही दर्ज की गईं.

सबसे ज्यादा अवैध खनन गतिविधियों वाले पांच जिले हैं - भीलवाड़ा, जयपुर, टोंक, पाली और राजसमंद है.

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सरकार ने बताया कि राजस्थान में अवैध खनन रोकने के कई कदम उठाए गए हैं. जुर्माना लगाना, वाहन जब्त करना, खदान कार्यालयों में बॉर्डर होम गार्ड तैनात करना. खनन वाहनों पर जीपीएस लगाना. खदान क्षेत्रों में जियोफेंसिंग जैसे उपाय किए जा रहे हैं. अवैध खनन पर 5 साल की जेल और प्रति हेक्टेयर 5 लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है.

फिर भी मामलों और FIR के बीच आंकड़ों का बड़ा अंतर है. जैसे सीकर जिले में 2020-21 में 207 खनन संबंधी मामले और 5 अवैध खनन के मामले थे, लेकिन एक भी FIR नहीं दर्ज हुई. टोंक में पांच साल में 510 FIR हुईं, जिनमें से 460 सिर्फ 2021-22 में हुईं, जबकि उस साल 716 मामले थे. अगले साल 734 मामले थे, लेकिन सिर्फ 1 FIR दर्ज हुई.

अरावली की पर्यावरण सुरक्षा के लिए सरकार अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट चला रही है. इसमें 29 जिलों में खराब हुई जंगल की जमीन पर पेड़ लगाए जा रहे हैं ताकि हरियाली वापस आए. यह आंकड़े दिखाते हैं कि अवैध खनन एक बड़ी समस्या बनी हुई है. कानूनी कार्रवाई में कमी है. विशेषज्ञों का कहना है कि सख्ती बढ़ाने और निगरानी मजबूत करने की जरूरत है ताकि अरावली का संवेदनशील पर्यावरण बच सके.

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव इस बारे में सफाई देते फिर रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में जिला स्तर पर जांच से पता चला है कि अरावली क्षेत्र में कानूनी रूप से मंजूर खनन बहुत कम जगह पर हो रहा है. कुल 37 अरावली जिलों के भौगोलिक क्षेत्र का सिर्फ 0.19 प्रतिशत हिस्सा ही इससे प्रभावित है.

दिल्ली में, जहां अरावली के पांच जिले हैं, कोई खनन की अनुमति नहीं है. अरावली के लिए सबसे बड़ा खतरा अवैध और बिना नियंत्रण वाला खनन है. सरकार के एम्पावर्ड कमेटी ने सुझाव दिया है कि निगरानी और कानून लागू करने को मजबूत किया जाए. ड्रोन और सर्विलांस जैसी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाए.

यह विवाद अप्रैल 2002 से शुरू हुआ, जब सेंट्रल एम्पावर्ड कमिटी (CEC) को हरियाणा के कोट और आलमपुर में अरावली क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनन की शिकायत मिली. अक्टूबर 2002 में सीईसी ने खनन तुरंत रोकने का आदेश दिया. मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो कोर्ट ने चिंता जताई कि ऐसे खनन से अरावली पूरी तरह खत्म हो जाएगी. 30 अक्टूबर 2002 को सुप्रीम कोर्ट ने पूरे अरावली क्षेत्र में सभी प्रकार के खनन पर पूरी रोक लगा दी.

इस फैसले से राजस्थान में हड़कंप मच गया. मार्बल, ग्रेनाइट और अन्य खनिजों का उद्योग ठप हो गया. लाखों लोग बेरोजगार हो गए. तत्कालीन अशोक गहलोत सरकार ने कोर्ट से गुहार लगाई कि चल रहे खनन को बंद न किया जाए क्योंकि इससे लोगों की रोजी-रोटी छिन जाएगी. दिसंबर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने चल रही खदानों को फिर शुरू करने की अनुमति दे दी, लेकिन नई खदानें या यूनिट्स शुरू करने पर रोक जारी रखी.

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स्थायी समाधान के लिए गहलोत सरकार ने एक कमेटी गठित की. क्योंकि अरावली को लेकर चारों राज्यों में एक नियम नहीं था, तो सभी राज्य अपने-अपने हिसाब से नियम-कायदे बनाते गए. मई 2003 में कमिटी ने अमेरिकी भू-आकृति विशेषज्ञ रिचर्ड मर्फी के एक सिद्धांत को आधार बनाया – जिसमें 100 मीटर ऊंचे टीले को ही पहाड़ी माना जाएगा.

कमेटी ने मर्फी के अन्य महत्वपूर्ण सिद्धांतों (संरचनात्मक विशेषताएं और क्षरण पैटर्न) को नजरअंदाज कर दिया. अगस्त 2003 में राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिए कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली जगहों पर खनन की संभावना तलाशी जाए. 2003 में वसुंधरा राजे सरकार आने के बाद इस फॉर्मूले को और आगे बढ़ाया गया. नए खनन पट्टे दिए जाने लगे. सरकार कोई भी रही हो, सहूलियत के हिसाब से नियमों का इस्तेमाल होता रहा है.

इस फॉर्मूले को 2002 के कोर्ट आदेश की अवमानना मानते हुए बंधुआ मुक्ति मोर्चा ने याचिका दायर की. अप्रैल 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी नए खनन आवंटनों पर रोक लगा दी. बाद में फिर खनन शुरू हुए, लेकिन कई जगहों पर ऊंचाई मापने में धांधली के आरोप लगे.

अल्टीमीटर से जमीन से चोटी की ऊंचाई नापकर 160 मीटर की पहाड़ी को 80-90 मीटर दिखाया गया. इससे अलवर, सिरोही और उदयपुर जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर खनन हुआ.

2010 में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) और सीईसी की रिपोर्टों में खुलासा हुआ कि राजस्थान में अवैध खनन तेजी से चल रहा है. अलवर में 2269 पहाड़ियों में से 25% पूरी तरह गायब हो चुकी थीं. कई पहाड़ियां धराशायी हो गईं. कोर्ट ने केंद्र सरकार से अरावली की स्पष्ट परिभाषा मांग ली.

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नवंबर 2025 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मर्फी फॉर्मूले को आगे बढ़ाते हुए सुझाव दिया कि स्थानीय राहत (लोकल रिलीफ) के आधार पर 100 मीटर ऊंची पहाड़ियां ही अरावली मानी जाएंगी. सबसे निचली कंटूर लाइन यानी पहाड़ के बेस से पूरे ढलान की सीमा के अंदर का पूरा क्षेत्र संरक्षित रहेगा.

20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने इस परिभाषा को सभी संबंधित राज्यों – राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली – के लिए एकसमान रूप से लागू कर दिया. कोर्ट ने नए खनन पट्टे देने पर भी रोक लगा दी, जब तक पूरे अरावली क्षेत्र के लिए सस्टेनेबल माइनिंग प्लान तैयार नहीं हो जाता.

सरकार का दावा है कि राजस्थान में यह फॉर्मूला 2006 से लागू है. अब पूरे क्षेत्र में एकरूपता आएगी, जिससे 90% से ज्यादा हिस्सा संरक्षित रहेगा. हालांकि, पर्यावरणविदों और विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला अरावली के लिए घातक है. ज्यादातर छोटी पहाड़ियां (10-50 मीटर ऊंची) अब संरक्षण के दायरे से बाहर हो सकती हैं.

इससे थार रेगिस्तान का फैलाव तेज होगा, भूजल स्तर गिरेगा और दिल्ली-एनसीआर में धूल-प प्रदूषण और बढ़ेगा. यह दो दशक पुराना विवाद अब भी खत्म नहीं हुआ है – एक तरफ आजीविका और विकास, दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण का सवाल बना हुआ है.

Source: AajTak
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मॉर्डना और मर्क कंपनी ने एक पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन थेरेपी विकसित की है, जो स्किन कैंसर के मरीजों के लिए फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में सफल साबित हुई है. यह थेरेपी मरीज के कैंसर
विज्ञान
कैंसर थेरेपी और वैक्सीन में क्या है अंतर

मॉर्डना और मर्क कंपनी ने एक पर्सनलाइज्ड mRNA कैंसर वैक्सीन थेरेपी विकसित की है, जो स्किन कैंसर के मरीजों के लिए फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में सफल साबित हुई है. यह थेरेपी मरीज के कैंसर म्यूटेशन के आधार पर तैयार की गई है. मॉर्डना और मर्क कंपनी ने दो कॉम्बिनेशन मिलाकर एक कैंसर वैक्सीन थेरेपी बनाई है. इसको फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में बड़ी सफलता मिली है. यह

5 days ago

तीन ज्वालामुखी, कुछ घंटे और अलग-अलग इलाके… पहली नजर में यह किसी बड़ी जियोलॉजिकल हलचल का संकेत लग सकता है. समझिए इन विस्फोटों के पीछे की वजह क्या है, कहीं भूकंप तो नहीं. इंडोनेशिया में
विज्ञान
इंडोनेशिया में 3 ज्वालामुखी फटे

तीन ज्वालामुखी, कुछ घंटे और अलग-अलग इलाके… पहली नजर में यह किसी बड़ी जियोलॉजिकल हलचल का संकेत लग सकता है. समझिए इन विस्फोटों के पीछे की वजह क्या है, कहीं भूकंप तो नहीं. इंडोनेशिया में मंगलवार रात कुछ ही घंटों के अंदर तीन एक्टिव ज्वालामुखियों में विस्फोट हुआ. पूर्वी जावा में माउंट सेमेरू, ईस्ट नुसा तेंगारा में माउंट लेवोटोबी लाकी-लाकी और नॉर्थ

5 days ago

सांप के जहर से यूं निकला था हाई बीपी की दवा का फार्मूला
विज्ञान
सांप के जहर से यूं निकला था हाई बीपी की दवा का फार्मूला

ब्राजील के जहरीले सांप Bothrops jararaca के जहर पर हुई रिसर्च की मदद से एक दवा बनाने की राह बनी. वैज्ञानिकों ने सांप के जहर में मौजूद ब्रैडीकिनिन-पोटेंशियेटिंग पेप्टाइड्स के बारे मे रिसर्च की और उससे प्रेरणा लेकर Captopril दवा विकसित हुई. बारिश के इस मौसम में देशभर के कई जिलों से सांप काटने की घटनाएं सामने आ रही हैं. इनमें कुछ लोगों की मौत भी हो गई है. सांप के जहर

5 days ago

मॉडर्ना और मर्क की MRNA थेरेपी ने मेलानोमा स्किन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाई है. फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में यह थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सफल रही है.
विज्ञान
दोबारा कैंसर फैलने से रोका जा सकेगा

मॉडर्ना और मर्क की MRNA थेरेपी ने मेलानोमा स्किन कैंसर के इलाज में नई उम्मीद जगाई है. फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल में यह थेरेपी कैंसर के दोबारा लौटने के जोखिम को काफी हद तक कम करने में सफल रही है. कैंसर की सर्जरी सफल हो जाने के बाद भी मरीज और डॉक्टरों के सामने एक बड़ा डर बना रहता है. कहीं बीमारी दोबारा वापस न आ जाए. खासकर स्किन कैंसर जिसे मेलानोमा कहते हैं

5 days ago

टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है.
विज्ञान
मसूरी-कैंपटी रूट पर भारी बारिश का कहर

टिहरी NH-707A डिमटा बैंड पर सड़क वॉशआउट से मसूरी-कैंपटी मार्ग बाधित हुआ है. यातायात ठप है. यात्रियों को परेशानी हो रही है. प्रशासन ने वैकल्पिक मार्ग अपनाने और धैर्य रखने की अपील की है. उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-707A पर भारी बारिश के कारण डिमटा बैंड के पास सड़क वॉशआउट हो गई है. मसूरी-कैंपटी-यमुना ब्रिज मार्ग का बड़ा हिस्सा

5 days ago

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे
विज्ञान
बच्चे को उल्टी-दस्त हो रहे हैं

बारिश के मौसम में बच्चों में उल्टी और दस्त के मामले बढ़ रहे हैं, जो दूषित पानी और बैक्टीरिया के कारण होते हैं. डॉ. हिमांशु भदानी के अनुसार, रोटावायरस, ई. कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया इस समस्या के मुख्य कारण हैं. बारिश के इस मौसम में बच्चों में उल्टी, दस्त के मामले बढ़ने लगते हैं. कई तरह के बैक्टीरिया के एक्टिव होने के कारण ऐसा होता है. उल्टी-

5 days ago

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे
विज्ञान
दिमाग का होना था इलाज

श्रीलंका के एक अस्पताल में स्ट्रोक के इलाज के दौरान एक मरीज के यूरिनरी ब्लैडर में 3.1 किलो की पथरी मिली, जो सबसे बड़ी ब्लैडर पथरी हो सकती है. मरीज को पेशाब करते समय दर्द की समस्या थी, जिसे नजरअंदाज किया गया था. श्रीलंका के एक अस्पताल में ऐसा मामला सामने आया है, जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया. 55 साल का एक मरीज स्ट्रोक ( ब्रेन अटैक) आने के बाद इलाज के

5 days ago

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा
विज्ञान
कांपा इंडोनेशिया

फ्लोरेस में 15 अगस्त के 7.7 भूकंप के बाद 20 अगस्त को 5.9 तीव्रता का नया झटका आया. 70 से अधिक मौतें हुई हैं. लगातार आफ्टरशॉक से डर बढ़ रहा है. राहत कार्य जारी है. इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में स्थित फ्लोरेस द्वीप पर भूकंप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. 15 अगस्त 2026 को सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था. अब 20 अगस्त गुरुवार को

5 days ago

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की
विज्ञान
चांद के अंधेरे राज खोलेगा चीन

चीन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पानी की बर्फ खोजने के लिए अपना बड़ा मिशन भेज रहा है. Chang'e-7 मिशन में रोवर, लैंडर और खास हॉपिंग प्रोब होंगे, जो चांद के उन अंधेरे गड्ढों तक पहुंचेंगे जहां सूरज की रोशनी नहीं पहुंचती. चीन 24 अगस्त 2026 को अपना नया चंद्र मिशन Chang'e-7 लॉन्च करने की तैयारी में है. यह मिशन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जाएगा. यहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ और

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उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और
विज्ञान
पहाड़ से गिरे पत्थर-मलबे ने रोकी रफ्तार

उत्तराखंड में बारिश के बीच पहाड़ से पत्थर और मलबा गिरने से बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे-07 बंद हो गया है. भल्लेगांव के पास सड़क पर मलबा आने से यातायात थम गया. रास्ता साफ करने के लिए टीमें और मशीनें मौके पर जुटी हैं. उत्तराखंड में बद्रीनाथ-केदारनाथ नेशनल हाईवे-07 पर बुधवार को रास्ता बंद हो गया. देवप्रयाग और कीर्तिनगर के बीच भगवान के पास भल्लेगांव में

5 days ago